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बच्चों की सुरक्षा पर फोकस: लखनऊ पुलिस ने POCSO व जुवेनाइल कानूनों पर कराया हाई-लेवल प्रशिक्षण

लखनऊ ।राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए लखनऊ पुलिस ने एक अहम और दूरगामी पहल की है। रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित संगोष्ठी सदन में “बाल संरक्षण एवं संबंधित विधिक प्रावधान” विषय पर आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला ने पुलिसिंग के मानकों को नया आयाम देने का काम किया है।

तेज और कानूनी रूप से सटीक बनाना

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यशाला का उद्देश्य स्पष्ट था—बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली को और अधिक मानवीय, तेज और कानूनी रूप से सटीक बनाना।

84 पुलिसकर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

इस कार्यशाला में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, मिशन शक्ति टीम, विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) से जुड़े कुल 84 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों को तकनीकी प्रस्तुतीकरण, केस स्टडी और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया।

कानून से लेकर व्यवहार तक—हर पहलू पर फोकस

प्रशिक्षण के दौरान POCSO Act, किशोर न्याय अधिनियम, बाल अधिकारों की सुरक्षा, पीड़ित सहायता, काउंसलिंग और अन्य एजेंसियों से समन्वय जैसे विषयों पर गहन जानकारी दी गई। खासतौर पर यह बताया गया कि संवेदनशील मामलों में पुलिस का व्यवहार कैसा होना चाहिए, ताकि पीड़ित बच्चों को न्याय के साथ-साथ मानसिक सहारा भी मिल सके।

विशेषज्ञों ने दिए व्यवहारिक गुर

कार्यशाला में चेतना एनजीओ के डायरेक्टर संजय गुप्ता और चाइल्ड राइट एडवोकेट वरुण पाठक ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने वास्तविक मामलों के उदाहरण देकर पुलिसकर्मियों को यह समझाया कि जमीनी स्तर पर किस तरह प्रभावी और संवेदनशील कार्रवाई की जाए।

क्यों अहम है यह पहल?

बढ़ते बाल अपराधों के बीच यह प्रशिक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब पुलिस सिर्फ कानून लागू करने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि पीड़ितों के लिए पहली मददगार भी है। सही प्रशिक्षण से न केवल मामलों का निस्तारण तेज होगा, बल्कि बच्चों और उनके परिवारों का भरोसा भी मजबूत होगा।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

पुलिस कमिश्नरेट ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे और इन्हें और अधिक उन्नत बनाया जाएगा। विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से पुलिस बल को लगातार अपडेट किया जाएगा।यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनशील पुलिसिंग की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे न सिर्फ पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि समाज में बच्चों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी और मजबूत होगा।

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