लखनऊ। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सफर अब महंगा पड़ सकता है। एक्सप्रेसवे का टोल तय कर दिया गया है, जिसमें एक तरफ का न्यूनतम शुल्क 275 रुपये रखा गया है। ऐसे में आम यात्रियों के लिए ट्रेनें ज्यादा सस्ता और तेज विकल्प बनती नजर आ रही हैं।करीब 3600 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 15 मई के बाद होने की संभावना है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
समय बनाम खर्च: ट्रेन आगे
अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे से सफर 35-40 मिनट में पूरा हो जाएगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे उन्नाव के शुक्लागंज तक ही जाता है। वहां से कानपुर शहर में प्रवेश के लिए जाजमऊ मार्ग से गुजरना होगा, जहां जाम की स्थिति बन सकती है। ऐसे में कुल यात्रा समय 1.5 से 2 घंटे तक पहुंच सकता है।
वहीं ट्रेन से सफर—
तेजस एक्सप्रेस: 1 घंटा 10 मिनट, किराया ~489 रु
शताब्दी एक्सप्रेस: 1 घंटा 18 मिनट, किराया ~500 रु
वंदे भारत एक्सप्रेस: ~1 घंटा 10-15 मिनट, किराया ~490 रु
इसके अलावा अन्य ट्रेनों में स्लीपर किराया करीब 150 रुपये तक उपलब्ध है।
टोल दरें (एक तरफ)
कार/जीप/वैन: 275 रुपये
हल्के कमर्शियल वाहन: 445 रुपये
बस/ट्रक: 935 रुपये
थ्री एक्सल वाहन: 1020 रुपये
‘लखनऊ-कानपुर’ या ‘लखनऊ-उन्नाव’ एक्सप्रेसवे?
दैनिक रेल यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने सवाल उठाया है कि एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर तक नहीं जाता, बल्कि उन्नाव के शुक्लागंज तक ही सीमित है। वहां से शहर में प्रवेश के लिए सामान्य सड़क का इस्तेमाल करना होगा, जिससे जाम की समस्या बढ़ सकती है।
दो चरणों में बना एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे दो चरणों में तैयार हुआ है—
स्कूटर इंडिया से बनी तक
बनी से उन्नाव (शुक्लागंज) तक
जहां एक तरफ एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार का दावा है, वहीं ज्यादा टोल और शहर में प्रवेश की जटिलता के कारण ट्रेनें अभी भी ज्यादा सुविधाजनक और किफायती विकल्प साबित हो रही हैं।
