लखनऊ । मेरठ स्थित पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं और संविदा कर्मियों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर चल रहे जन-जागरण अभियान के तहत यह प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों कर्मियों ने निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के खिलाफ जोरदार विरोध जताया।

डर और दमन” की नीति अपनाने का आरोप लगाया

सभा को संबोधित करते हुए संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर “डर और दमन” की नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई वापस नहीं ली गई, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

निजीकरण के खिलाफ नाराजगी

कर्मचारियों ने पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के संचालन को 25 साल के लिए निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया पर कड़ा विरोध जताया। वक्ताओं का कहना है कि विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण और परियोजनाओं को निजी हाथों में देने से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

दमनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग

संघर्ष समिति ने 2022 के समझौते को लागू करने, कर्मचारियों पर दर्ज एफआईआर, निलंबन और तबादलों को वापस लेने की मांग की। साथ ही हटाए गए संविदा कर्मियों की बहाली और आउटसोर्स कर्मचारियों को समाहित करने की भी मांग उठाई गई।

प्रबंधन पर गंभीर आरोप

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सेवा नियमों में बदलाव, फेशियल अटेंडेंस, वेतन कटौती और जबरन स्मार्ट मीटर लगाने जैसी नीतियां तानाशाहीपूर्ण हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इन फैसलों से गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

संघर्ष समिति ने साफ किया कि यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों की नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आंदोलन के बावजूद बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी।

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