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2000 करोड़ के कफ सिरप तस्करी रैकेट का पर्दाफाश: प्रयागराज से पिता-पुत्र गिरफ्तार

लखनऊ। प्रयागराज से शुरू होकर सोनभद्र, दिल्ली, गाजियाबाद और बांग्लादेश बॉर्डर तक फैले एक खतरनाक कफ सिरप तस्करी नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसआईटी की कार्रवाई में इस रैकेट से जुड़े पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनका नेटवर्क नशे के अवैध कारोबार में बड़े स्तर पर सक्रिय था।पकड़े गए आरोपी विनोद कुमार वर्मा और उसका बेटा संस्कार वर्मा “ओम साईं फार्मास्यूटिकल” के नाम से फर्म चलाते थे, लेकिन असल में यह फर्म कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई का बड़ा अड्डा बन चुकी थी।

चिप्स-नमकीन के बीच छिपकर चलता था ‘जहर’

जांच में सामने आया है कि आरोपी दिल्ली की एक कंपनी से बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप मंगाते थे और उसे गाजियाबाद के मेरठ रोड स्थित एक गुप्त डिपो में स्टोर करते थे। यहां से सिरप को कंटेनरों में चिप्स और नमकीन के पैकेटों के बीच छिपाकर अगरतला (त्रिपुरा) के रास्ते बांग्लादेश सीमा तक भेजा जाता था, जहां इसे नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

1 लाख से ज्यादा शीशियां बरामद, 59 हजार सीधे इसी नेटवर्क से जुड़ी

18 अक्तूबर 2025 को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र में दो कंटेनर ट्रकों से 1,19,675 शीशियां बरामद की गई थीं। इनमें से 59,675 शीशियां इसी गिरोह की निकलीं। इसी सुराग के आधार पर एसआईटी ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को धर दबोचा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला था नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, यह रैकेट केवल यूपी या भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि बांग्लादेश तक इसकी सप्लाई लाइन सक्रिय थी। मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के इशारे पर यह पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा था, जिसमें कई राज्यों और शहरों के लोग शामिल थे।

2000 करोड़ का काला खेल, लेकिन ईडी की कार्रवाई धीमी

इस पूरे मामले में करीब 2000 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार की बात सामने आ रही है। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर सका है, जबकि प्रदेश पुलिस करीब 500 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है।सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने जांच शुरू जरूर की, लेकिन अधिकारियों के तबादले और अन्य कारणों से मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।

अब भी कई बड़े चेहरे बेनकाब होना बाकी

पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई बड़े नाम और कड़ियां अभी भी जांच के दायरे में हैं। एसआईटी अब इस रैकेट से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।साफ है कि “दवा” के नाम पर चल रहा यह कारोबार दरअसल नशे का एक खतरनाक जाल था, जिसने हजारों युवाओं की जिंदगी को प्रभावित किया। अब देखना होगा कि इस नेटवर्क के बाकी चेहरे कब बेनकाब होते हैं।

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