लखनऊ । राजधानी में बिजली विभाग से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां पावर कॉरपोरेशन में संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की बड़े स्तर पर छंटनी की तैयारी को लेकर हड़कंप मच गया है।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन संविदा कर्मियों के साथ अन्याय कर रहा है। बेहद कम वेतन पर काम करने वाले इन कर्मचारियों को न केवल नजरअंदाज किया जा रहा है, बल्कि उन्हें नौकरी से भी निकाला जा रहा है।

पहले भी लेसा क्षेत्र में कई कर्मियों को हटाया जा चुका

समिति का कहना है कि जहां सरकार ने संविदा कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए आउटसोर्स निगम बनाने का निर्णय लिया था, वहीं पावर कॉरपोरेशन ने खुद को इससे अलग रखने की कोशिश की। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि प्रबंधन जानबूझकर कर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था से बाहर रखना चाहता है।आरोप है कि ‘वर्टिकल व्यवस्था’ और नई ERP प्रणाली लागू कर 1 अप्रैल 2026 से सैकड़ों कर्मियों का वेतन रोकने और उन्हें हटाने की योजना बनाई जा रही है। पहले भी लेसा क्षेत्र में कई कर्मियों को हटाया जा चुका है, और अब करीब 326 और कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी है।

नीति नहीं बदली गई तो भीषण गर्मी के दौरान बड़ा आंदोलन किया जाएगा

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि अन्य विभागों में जहां संविदा कर्मियों का मानदेय बढ़ाया जा रहा है, वहीं यहां इसके उलट कार्रवाई हो रही है, जो निजीकरण की ओर इशारा करती है।समिति ने चेतावनी दी है कि अगर यह नीति नहीं बदली गई तो भीषण गर्मी के दौरान बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसका असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।बताया जा रहा है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का आंदोलन लंबे समय से जारी है और अब यह मुद्दा और ज्यादा गर्माता नजर आ रहा है।

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