वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में कहा है कि वहां की इस्लामिक सरकार के आदेश पर प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा की जा रही है। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि अमेरिका मदद भेज रहा है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह मदद किस स्वरूप की होगी।


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ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के परिणामस्वरूप मरने वालों की संख्या 12,000 तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान निहत्थे लोगों को सैन्य हथियारों, एके-47 और बख्तरबंद वाहनों से निशाना बनाया गया, और शव बुलडोजर से हटाए जा रहे हैं।

हिंसा और अशांति के कारण मृतकों की संख्या बढ़ गई

निर्वासित ईरानी राजकुमार रजा पहलवी ने मंगलवार को कहा कि हाल के दिनों में हिंसा और अशांति के कारण मृतकों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे प्रदर्शनकारियों को समर्थन दें। पहलवी ने कहा, “पिछले दो दिनों में मारे गए लोगों की संख्या 9/11 के आतंकवादी हमलों में मृत लोगों की संख्या से चार गुना अधिक है।

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“ईरान इंटरनेशनल के संपादकीय बोर्ड ने मेडिकल डेटा और स्थानीय सूत्रों की समीक्षा के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि 8 और 9 जनवरी की रात विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 12,000 लोग मारे गए। इस पर नीदरलैंड, स्पेन और फिनलैंड सहित कई यूरोपीय देशों ने ईरान के राजदूतों को तलब किया और प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की कड़ी निंदा की।

अब्दुल हामिद ने भी प्रदर्शनकारियों की हत्या की निंदा की

ईरान के सर्वोच्च सुन्नी धर्मगुरु मौलवी अब्दुल हामिद ने भी देश भर के शहरों में प्रदर्शनकारियों की हत्या की निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा के आदेश देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। मौलवी ने कहा, “तेहरान और अन्य शहरों में हजारों प्रदर्शनकारियों का नरसंहार दुखद है। यह घटना ईरान और दुनिया भर के स्वतंत्रता समर्थक लोगों की अंतरात्मा को गहरा चोट पहुंचाती है।”इस बीच, अमेरिका में राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की आलोचना की जा रही है।

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(X) पर खामेनेई की तस्वीर जलाते हुए साझा की

अमेरिकी प्रतिनिधि क्लाउडिया टेनी ने ट्विटर (X) पर खामेनेई की तस्वीर जलाते हुए साझा की। न्यूयॉर्क की रिपब्लिकन हाउस सदस्य ने भी लोगों से विरोध स्वरूप कार्रवाई करने की अपील की।ईरान में प्रदर्शन और सरकारी प्रतिक्रिया की यह स्थिति अब अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन गई है और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों के लिए भी चिंता का विषय बन रही है।

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