संभल/लखनऊ। यूपी के संभल जिले में एक अजीबोगरीब और सनसनीखेज मामला सामने आया है। 19 दिन पहले बहजोई थाना क्षेत्र में एक युवक का सिर कुचलकर शव मिला था। शव की पहचान सुशील कुमार (43) के रूप में की गई, जिसे उत्तराखंड के काशीपुर निवासी परिजनों ने अंतिम संस्कार कर, तेरहवीं भी कर दी।लेकिन मंगलवार को चौंकाने वाला खुलासा हुआ – सुशील जिंदा हैं और बहजोई में ही घूम रहे थे।
बहन विमला ने भाई को जिंदा देखकर खुशी के आंसू बहाए
पुलिस ने उन्हें पकड़कर थाने लाया, जहां उन्होंने अपने परिवार से संपर्क कराया। बहन विमला ने भाई को जिंदा देखकर खुशी के आंसू बहाए।कोतवाली प्रभारी संत कुमार ने बताया कि शव, जिसकी पहचान सुशील के रूप में की गई थी, किसी अन्य व्यक्ति का है। अब पुलिस उस अज्ञात शव की असली पहचान और हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है।
शरीर पर टैटू, कद-काठी और पहनावा सुशील से मेल खाते थे
24 दिसंबर, 2025 को बहजोई चांदनी चौक मार्केट के निर्माणाधीन दुकान में सिर कुचला शव मिला था। पोस्टमार्टम के बाद शव को सुशील के परिजनों को सौंप दिया गया। शरीर पर टैटू, कद-काठी और पहनावा सुशील से मेल खाते थे, इसलिए परिजन ने अंतिम संस्कार और तेरहवीं कर दी।मंगलवार को पुलिस को सूचना मिली कि सुशील जिंदा हैं। उनकी लोकेशन बहजोई में एक चौराहे पर मिली। पुलिस ने उन्हें पकड़कर परिजनों के सामने पेश किया। परिवार हक्का-बक्का रह गया और खुशी के आंसू बहाए।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है – जो शव 19 दिन पहले मिला था, वह आखिरकार किसका था? हत्या की रिपोर्ट दर्ज है, लेकिन असली शिकार की पहचान अभी नहीं हो पाई है। पुलिस ने सर्विलांस टीम और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से जांच तेज कर दी है।भाई अनिल कुमार ने बताया, “हमने अंतिम संस्कार और तेरहवीं में करीब 15 हजार रुपये खर्च किए। हाथ पर टैटू और कद-काठी देख हम भूलकर भी उसे अपने सुशील समझ बैठे। अब भाई जिंदा है तो खुशी की बात है।”
हम हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में लगे हैं : कोतवाली प्रभारी
कोतवाली प्रभारी संत कुमार ने कहा, “हम हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में लगे हैं। अब मुख्य चुनौती यह है कि शव की असली पहचान की जाए और हत्यारे तक पहुंचे।”सुशील पर चोरी-मारपीट के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, मंगलवार को चोरी की एक जांच के दौरान उनकी लोकेशन ट्रेस हुई और पकड़े जाने पर ही यह रहस्य खुला।संभल की यह घटना साबित करती है कि कभी-कभी मौत और जीवन के बीच का फ़ासला केवल भ्रम भर होता है।
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