एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । राजधानी के केजीएमयू में चल रही धर्मांतरण जांच ने अचानक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने पूरे चिकित्सा जगत को हिला दिया है। धर्मांतरण के आरोपों की जांच कर रही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच सोमवार को स्थगित कर दी गई और अब यह हाई-प्रोफाइल मामला सीधे स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के हवाले कर दिया गया है। STF की जांच में कई बड़े नाम और डॉक्टरों की भूमिका उजागर होने की आशंका जताई जा रही है।
पूर्व डीजीपी की पड़ताल में गहरी साजिश के संकेत
25 दिसंबर को गठित पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने करीब 20 दिनों में आधा दर्जन से ज्यादा बैठकों के जरिए पैथोलॉजी विभाग के फैकल्टी और स्टाफ से अलग-अलग बयान दर्ज किए। लेकिन जांच के दौरान तब हलचल मच गई, जब कमेटी के टॉप एक्सपर्ट और पूर्व पुलिस महानिदेशक भावेश कुमार सिंह ने बाकी सदस्यों को बाहर कर फैकल्टी मेंबर्स से अकेले में पूछताछ की। पीड़िता और उसके पिता से भी गहन बातचीत कर उन फैकल्टी मेंबर्स के नाम जुटाए गए, जिन्होंने शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं की।
कई डॉक्टर रडार पर
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में जैसे ही पूर्व डीजीपी को इस मामले में गहरी साजिश के संकेत मिले, उन्होंने जांच STF को सौंपने की सिफारिश कर दी। इसी बीच सोमवार शाम कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचीं, जहां मुख्यमंत्री ने खुद इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए STF से ही आगे की जांच कराने के निर्देश दे दिए।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद STF की एंट्री
हालांकि KGMU प्रशासन का दावा है कि शुरुआती जांच में कैंपस के भीतर किसी संगठित धर्मांतरण गैंग के स्पष्ट सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन STF की एंट्री के साथ ही पूरे मामले में बड़े खुलासों की आशंका तेज हो गई है। फिलहाल जांच से जुड़े सभी दस्तावेज सील कर कुलपति कार्यालय में सुरक्षित रख दिए गए हैं और STF ने जांच शुरू कर दी है। अब सबकी निगाहें STF की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो KGMU के भीतर छिपे राज़ों से पर्दा उठा सकती है।
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