प्रयागराज।माघ मेले के सबसे बड़े और पावन स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर संगम तट श्रद्धा और आस्था के सागर में तब्दील हो गया है। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम घाटों की ओर उमड़ पड़ी, जहां हर कोई पुण्य की डुबकी लगाकर आध्यात्मिक लाभ अर्जित करने को आतुर दिखाई दिया। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, आज करीब साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर सकते हैं।

मेला पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए जल, थल और नभ—तीनों स्तरों पर निगरानी की जा रही है। संगम क्षेत्र और संवेदनशील स्थलों पर ड्रोन कैमरों, जल पुलिस और आरएएफ की तैनाती की गई है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मौनी अमावस्या का पुण्यकाल 17 जनवरी रात 11:53 बजे से प्रारंभ होकर 18 जनवरी रात 1:08 बजे तक रहेगा। ऐसे में स्नान का क्रम देर रात तक जारी रहने की संभावना है। मान्यता है कि इस दिन मौन धारण कर स्नान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने को विशेष योजना लागू

माघ मेला अधिकारी ऋषि राज के अनुसार मौनी अमावस्या के स्नान पर्व को लेकर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्नान घाटों का निर्माण किया गया है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी घाटों का उपयोग करें। इसके अलावा पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के माध्यम से पूरे मेले की लगातार निगरानी की जा रही है। यातायात व्यवस्था को भी सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष योजना लागू की गई है।

संवेदनशील स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही

प्रशासन के मुताबिक, मौनी अमावस्या से एक दिन पहले ही करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। भीड़ बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त बल तैनात करने और व्यवस्थाओं को और सख्त करने की तैयारी भी की गई है।पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की अव्यवस्था न होने पाए। संवेदनशील स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है और हर गतिविधि पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है।

मौनी अमावस्या को सभी स्नान पर्वों में सर्वाधिक पुण्यदायी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो श्रद्धालु माघ महीने में कल्पवास नहीं कर पाते, यदि वे मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान कर लें, तो उन्हें पूरे एक माह के कल्पवास के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार मौनी अमावस्या पर बुधादित्य, महालक्ष्मी, भौमादित्य और नारायण योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस स्नान पर्व का महत्व और बढ़ गया है।ज्योतिषाचार्य दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, मौनी अमावस्या को सभी स्नान पर्वों में सर्वाधिक पुण्यदायी माना गया है। इस दिन पितरों के निमित्त दान-पुण्य का भी विशेष विधान है। इसी आस्था के चलते संगम तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार बढ़ता जा रहा है।

यह भी पढ़े : माघ मेला : मकर संक्रांति पर प्रयागराज में आस्था का महासंगम, 1.03 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

यह भी पढ़े : 2027 में बिना गठबंधन मैदान में उतरेगी बसपा, मायावती का ऐलान-अपने दम पर बनेगी सरकार

यह भी पढ़े : छत पर खून का तांडव, मां-पत्नी की बेरहमी से हत्या, गांव वालों के सामने फेंकता रहा मांस के टुकड़े

यह भी पढ़े : प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत से बढ़ी सियासी हलचल, कटियार की दावेदारी ने बढ़ाया नेतृत्व का धर्मसंकट

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *