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POSH अधिनियम पर लखनऊ पुलिस की बड़ी पहल, महिला आरक्षियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उत्पीड़न-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई। महिला पुलिसकर्मियों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम-2013 (POSH Act) के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

POSH अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी गई

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस आयुक्त लखनऊ अमरेन्द्र कुमार सेंगर के नेतृत्व तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) श्री अमित वर्मा के निर्देशन में आयोजित हुआ। कार्यशाला का संचालन अनुष्का, सहायक पुलिस उपायुक्त, पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के नेतृत्व में किया गया।कार्यक्रम शुक्रवार शाम 4:00 बजे, रिजर्व पुलिस लाइन, कमिश्नरेट लखनऊ स्थित संगोष्ठी सदन में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण सत्र में सुरम्य (सुरक्ष्य) लाइफ फाउंडेशन की संस्थापक एवं निदेशक अंशू श्रीवास्तव ने अपनी टीम के साथ प्रमुख वक्ता के रूप में POSH अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला के मुख्य बिंदु

प्रशिक्षण का प्रमुख विषय कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित POSH अधिनियम-2013 के कानूनी प्रावधानों, उसके उद्देश्य, दायरे और व्यावहारिक पहलुओं पर केंद्रित रहा। प्रतिभागियों को यह बताया गया कि किन परिस्थितियों में यौन उत्पीड़न की श्रेणी बनती है, पीड़ित को किन अधिकारों की सुरक्षा प्राप्त है तथा शिकायत की प्रक्रिया क्या है।

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दंडात्मक प्रावधानों पर भी विस्तार से हुई चर्चा

कार्यशाला में लगभग 150 महिला रिक्रूट आरक्षियों एवं अन्य महिला पुलिसकर्मियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की भूमिका, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, गोपनीयता, समयबद्ध निस्तारण और दंडात्मक प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में पहल

अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य महिला पुलिसकर्मियों को न केवल उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराना है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्य वातावरण उपलब्ध कराना भी है।

यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों को गंभीरता से लिया जाए

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा समय-समय पर ऐसे जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुलिस बल के भीतर शून्य सहनशीलता की नीति के तहत यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों को गंभीरता से लिया जाए।

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यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला रिक्रूट आरक्षियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पुलिस विभाग में एक सुरक्षित, संवेदनशील और उत्पीड़न-मुक्त कार्यसंस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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