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अपराधियों को उम्र कैद की सजा दिलाने में प्रदेश में अव्वल गोरखपुर जिला

गोरखपुर। एडीजी गोरखपुर जोन द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन शिकंजा का परिणाम दिखने लगा है। जिले में 49 मामलों में 127 लोगों को आजीवन कारावास की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गई। वही चार लोगों को 20-20 साल की भी सजा न्यायालय द्वारा दी गई।एसपीओ वीडी मिश्रा द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक एडीजी जोन अखिल कुमार द्वारा चलाए गए ऑपरेशन शिकंजा का असर अब दिखने लगा है।जिले में एक जनवरी से 31 जनवरी 2022 के बीच 49 मामलों में 127 लोगों को आजीवन कारावास की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गई।

तीन मामलों में 4 लोगों को 20- 20 साल की सजा सुनाई गई

वही तीन मामलों में 4 लोगों को 20- 20 साल की सजा सुनाई गई।ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर द्वारा समन्वय के साथ न्यायालय में मुस्लिमों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की गई। जिसके परिणाम स्वरूप गोरखपुर जिला पूरे प्रदेश में आजीवन कारावास मुल्जिमों को देने के मामले में अव्वल नंबर पर रहा। एसपीओ वी डी मिश्रा ने बताया कि ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस ऑफिस में एक स्पेशल सेल कायम किया गया।इस सेल के तहत गवाहों की मानिटरिंग समय-समय पर होनी।वहीं पब्लिक प्रॉसिक्यूटर्स न्यायालय में गवाहों,साक्ष्यों और तथ्यों को सही ढंग से पेश किया। जिसका परिणाम यह रहा कि जल्द से जल्द न्यायालय ने मुकदमों में आरोपी बनाए लोगों को सजा देकर उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाया।

अपराधियों के अंदर एक भय व्याप्त हुआ

एडीजी अखिल कुमार द्वारा न्यायालय से सजा पाए मुजरिम की खबरें मीडिया के जरिए प्रचार-प्रसार करा कर अपराध के रोकथाम के लिए एक माहौल बनाया गया। न्यायालय द्वारा मुजरिम को कठोर सजा दिए जाने की खबरों से अपराधियों के अंदर एक भय व्याप्त हुआ जिससे अपराध का ग्राफ भी तेजी से नीचे गिरा। श्री मिश्रा ने कहा कि अपराधियों को अब इस बात का भय सताने लगा है कि अपराध करने के बाद न्यायालयों से बच पाना मुश्किल है।

पहले पुलिस और प्रॉसिक्यूटर के बीच समन्वय ना होने का पूरा लाभ अपराधियों को मिल जाता था जो कि ऑपरेशन शिकंजा के बाद अब खत्म हो गया है। एक दूसरे के साथ बेहतरीन कोआर्डिनेशन का नतीजा है कि आज गोरखपुर जिला सबसे अधिक आजीवन कारावास जैसी सजा मुलजिम को दिला पानी में प्रदेश में अव्वल नंबर पर है। गौरतलब है कि 24 राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामले भी दर्ज किए गए जिसमें शत-प्रतिशत अनुमोदन भी प्राप्त हुआ।

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