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हर जिले के टॉप अपराधियों की पहचान कर अधिकारी स्वयं रखे निगरानी : डीजीपी

एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ।उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जोनल एडीजी, पुलिस कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, एसएसपी और एसपी समेत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर केंद्रित संवाद किया। इस अवसर पर एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी

डीजीपी ने कहा कि “जीरो टॉलरेंस” सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि एक दृष्टिकोण है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के टॉप 10 अपराधियों की पहचान कर उस पर अधिकारी स्वयं निगरानी रखें और तकनीक के माध्यम से विसंगतियों को खत्म करें।विगत वर्षों में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बना है लेकिन इसमें और सुधार की आवश्यकता है। आगरा ज़ोन के “ऑपरेशन पहचान” की तरह तकनीकी टूल्स का उपयोग कर छेड़छाड़ के मामलों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

जन शिकायतों का त्वरित निस्तारण

इसे डीजीपी ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और कहा कि शिकायतों के समाधान के आधार पर ही अधिकारियों का मूल्यांकन होगा। एक नई SOP भी जल्द जारी की जाएगी।अधिकारियों को माइक्रो लेवल प्लानिंग, फोरसाइट और नेतृत्व क्षमता के साथ हर छोटी जानकारी को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए।प्रदेश को साइबर क्राइम नियंत्रण में देश में अग्रणी बनाने का लक्ष्य तय किया गया। प्रशिक्षण, जन-जागरूकता और तकनीकी दक्षता को बढ़ाने पर बल दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं को इसमें जोड़ने पर दिया बल

UPP COP ऐप में सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं को इसमें जोड़ने पर बल दिया गया।जवानों में विश्वास पैदा करने और ज़ोन एवं रेंज स्तर पर कल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।चयनित जवानों की प्रतिभा की मैपिंग कर उन्हें उनकी योग्यताओं के अनुसार जिम्मेदारी देने के निर्देश दिए गए।

प्रौद्योगिकी और AI के प्रयोग पर प्रयोग

यूपी पुलिस को देश की पहली ऐसी फोर्स बनाने की बात कही गई जो AI आधारित पुलिसिंग में अग्रणी हो।डीजीपी ने कहा कि सेवा के हर चरण में प्रशिक्षण से ही गुणवत्तापूर्ण पुलिसिंग संभव है। वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रणाली को बेहतर करने के लिए सुझाव देने को कहा गया।

जन शिकायतों पर विशेष प्रस्तुतिकरण

बैठक के अंत में डीजीपी ने जन शिकायतों के बेहतर निस्तारण पर एक प्रस्तुतिकरण दिया और अधिकारियों से शिकायतकर्ताओं से संवेदनशील व्यवहार, तत्काल सुनवाई और पारदर्शिता बरतने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि थानों में पोस्टिंग पूरी तरह से मेरिट के आधार पर ही की जाए।यह संवाद न केवल राज्य में कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यूपी पुलिस को एक प्रोफेशनल और तकनीक-सक्षम बल के रूप में भी स्थापित करेगा।

यूपी की कानून व्यवस्था उत्कृष्ट बन चुका है मानक

पुलिस महानिदेशक ने बैठक की शुरुआत में कहा कि उत्तर प्रदेश पिछले आठ वर्षों में न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उत्कृष्ट कानून-व्यवस्था का मानक बन चुका है, जो मुख्यमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने अधिकारियों को प्रोफेशनल दृष्टिकोण अपनाने और अंतरराष्ट्रीय बेस्ट प्रैक्टिसेस को अपनी कार्यशैली में शामिल करने का निर्देश दिया।

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