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राघव चड्ढा का आम आदमी पार्टी से इस्तीफा, दो तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में विलय की घोषणा

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आआपा) में शुक्रवार को बड़ी फूट सामने आई है। राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा समेत आआपा के 07 सांसदों यानी दो तिहाई ने पार्टी छोड़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय करने की घोषणा की है।दिल्ली के कॉन्स्टीच्यूशन क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी छोड़ने की घोषणा के साथ भाजपा में विलय करने की घोषणा की।

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य

राघव चड्डा ने दावा किया कि “राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य हैं, जिनमें से दो-तिहाई से ज़्यादा सदस्यों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। आज सुबह इन सभी 7 सदस्यों के हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंपे गए हैं।उनमें से तीन आपके सामने यहां मौजूद हैं। इनके अलावा हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी हैं।“चड्ढा ने कहा “आप कई सालों से मुझसे पूछते रहे कि मैं आम आदमी पार्टी की गतिविधियों में हिस्सा क्यों नहीं ले रहा था और उससे दूर क्यों दिख रहा था। उस समय मैंने कुछ नहीं कहा और हालात बेहतर होने का इंतज़ार करता रहा। लेकिन आज मैं इसकी असली वजह बताना चाहता हूँ, मैं उनके ‘गुनाहों’ में शामिल नहीं होना चाहता था।

मैं उनकी दोस्ती के लायक नहीं था

मैं उनकी दोस्ती के लायक नहीं था क्योंकि मैं उनके गलत कामों में भागीदार नहीं बना।“उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने खून-पसीने से सींचा, वह अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। अब यह पार्टी देशहित में काम नहीं कर रही बल्कि अपने निजी स्वार्थों के लिए काम कर रही है। ”पिछले कुछ वर्षों से मुझे महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही इनसान हूं इसलिए आज मैं घोषणा करता हूं कि मैं आम आदमी पार्टी से दूरी बना रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं।”

अब उच्च सदन में केवल 3 प्रतिनिधि रह गए

राघव चड्ढा के दावों के मुताबिक सात राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद आआपा के पास अब उच्च सदन में केवल 3 प्रतिनिधि रह गए हैं। जिसमें संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सिचेवाल शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक राघव चड्डा, संदीप सिंह और अशोक मित्तल जल्द ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होंगे।

राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद की जिम्मेदारी सौंपी थी

दलबदल विरोधी कानून के तहत, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई या उससे अधिक सांसद या विधायक एक साथ पार्टी छोड़ते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती है। यह प्रावधान संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है। राज्यसभा में भाजपा के 106 सदस्य हैं। आम आदमी पार्टी के सात सदस्यों के विलय के बाद यह संख्या 113 हो जाएगी।आआपा ने इसी माह 2 अप्रैल को राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाते हुए सदन में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी थी।उनके स्थान पर पार्टी ने सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद की जिम्मेदारी सौंपी थी।

उठा तूफान पार्टी में बड़ी टूट का कारण बना

इसी कार्रवाई से उठा तूफान पार्टी में बड़ी टूट का कारण बना है। कार्रवाई के अगले 3 अप्रैल को राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया के जरिए तीखा जवाब देते हुए कहा कि ”मैंने हमेशा संसद में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया है, मैं वहां सरकार पर दबाव डालने के लिए हूं, हंगामा करने के लिए नहीं।” उन्होंने फिल्मी अंदाज में उन्होंने कहा था, हर झूठ का पर्दाफाश होगा क्योंकि मैं घायल हूं इसलिए घातक हूं।2 अप्रैल की कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद 22 दिनों में आआपा के लिए बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया।

कौन हैं राघव चड्ढा

राघव चड्ढा का जन्म 11 नवंबर 1988 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बने। साल 2013 में अन्ना आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल से उनकी मुलाकात हुई। पार्टी के युवा प्रवक्ता बनाए गए राघव चड्ढा साल 2012 में दिल्ली लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने में मदद की और साल 2013 में आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र बनाने वाली टीम के सदस्य थे।

चड्ढा 33 साल के थे और सबसे युवा सांसद बने

वह पार्टी के कोषाध्यक्ष पद पर भी रहे। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें दक्षिणी दिल्ली की संसदीय सीट पर उतारा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2020 विधानसभा चुनाव में उन्होंने दिल्ली की राजेंद्रनगर सीट से जीत दर्ज की। साल 2022 में पार्टी ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उस समय राघव चड्ढा 33 साल के थे और सबसे युवा सांसद बने।-

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