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निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल के खिलाफ प्रदेशभर में बिजली कर्मियों का प्रदर्शन

लखनऊ। निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में गुरुवार को उत्तर प्रदेश सहित देशभर में बिजली कर्मियों ने व्यापक प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर कार्यालयों से बाहर निकलकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

जेल भरो’ और ‘लाइटनिंग स्ट्राइक’ की चेतावनी

संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया गया और निजीकरण के लिए टेंडर जारी किया गया, तो प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारी सामूहिक ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।समिति ने केंद्र सरकार को भी आगाह करते हुए कहा कि यदि संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पारित करने की कोशिश की गई, तो देशभर के करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी बिना अतिरिक्त नोटिस के तत्काल ‘लाइटनिंग स्ट्राइक’ पर चले जाएंगे।

पुरानी पेंशन योजना बहाल करना शामिल

आंदोलन की प्रमुख मांगों में पावर सेक्टर के निजीकरण का विरोध, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेना, उत्तर प्रदेश में निजीकरण प्रक्रिया निरस्त करना तथा बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करना शामिल है।संघर्ष समिति ने बताया कि पहली बार बिजली कर्मचारियों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी सक्रिय भागीदारी की। राजधानी लखनऊ के शक्ति भवन सहित प्रदेश के सभी जिलों में हजारों किसान भी प्रदर्शन में शामिल हुए। लखनऊ में आयोजित सभा को संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा के एकादशी यादव और दिनेश रावत ने संबोधित किया।

सुरक्षा और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता प्रभावित हो रही

समिति ने आरोप लगाया कि पावर सेक्टर में नियमित कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने आउटसोर्सिंग पर रोक, नियमित पदों पर सीधी भर्ती और आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण की मांग दोहराई।संघर्ष समिति का कहना है कि वितरण, उत्पादन और ट्रांसमिशन क्षेत्र में निजीकरण गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों और आम जनता के हितों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की रक्षा के लिए कर्मचारी निर्णायक संघर्ष को तैयार हैं।

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