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सपा नेता आजम खां को फिर भेजा गया सीतापुर जेल

लखनऊ। सपा नेता आजम खां को फिर सीतापुर की जेल भेज दिया गया है, जबकि अब्दुल्ला को हरदोई भेजा है।प्रशासन को शनिवार की रात शासन का आदेश मिला। इसके बाद सुबह 4:50 बजे दोनों को रामपुर जेल से सीतापुर और हरदोई ले जाया गया। अपर पुलिस अधीक्षक संसार सिंह ने बताया कि अब्दुल्ला हरदोई की जेल पहुंच गए हैं, जबकि आजम खां सीतापुर पहुंचने वाले हैं।

आजम खां की पत्नी पूर्व सांसद डा. तजीन फात्मा को रामपुर की जेल में ही रखा गया है। इन तीनों को 18 अक्टूबर को अदालत ने अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में सात साल की सजा सुनाई थी। इसी मामले में तीनों ने 26 फरवरी 2020 को अदालत में समर्पण किया था। तब भी तीनों को सीतापुर की जेल भेजा गया था। तजीन फात्मा 10 माह, अब्दुल्ला 23 माह और आजम खां सवा दो साल बाद जमानत पर छूट सके थे।

हमारा हो सकता है एनकाउंटर : आजम खां

बेटे के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में फंसे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां को रविवार तड़के जेल से निकाला गया तो वह बोले, हमारी जान को खतरा है। हमारा एनकाउंटर हो सकता है और कुछ भी हो सकता है।आजम खां को बेटे अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में 18 अक्टूबर को सात साल की सजा सुनाई गई थी। उनके साथ ही उनकी पत्नी पूर्व सांसद तजीन फात्मा और अब्दुल्ला को भी सात साल की सजा हुई है। शासन ने अब्दुल्ला को हरदोई और आजम खां को सीतापुर की जेल स्थानांतरित किया है।

आजम खां समाजवादी पार्टी के फायर ब्रांड नेता रहे

रविवार सुबह 4:50 बजे अब्दुल्ला और आजम खां को जेल से बाहर निकल गया तो वहां कुछ मीडिया कर्मी पहुंच गए। उन्हें देखते ही आजम खां बोले, हमारी जान खतरे में है। हमारा एनकाउंटर भी हो सकता है। आजम खां समाजवादी पार्टी के फायर ब्रांड नेता रहे हैं। वह रामपुर शहर से 10 बार विधायक चुने गए।

उत्तर प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष भी रहे। राज्यसभा सदस्य भी बने। साल 2019 में लोकसभा सदस्य का चुनाव जीते। प्रदेश में जब भी समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तब वह कई-कई विभागों के मंत्री बने। वह हमेशा तीखे अंदाज में बात करते रहे हैं। जेल शिफ्टिंग के दौरान भी उन्होंने कुछ इसी अंदाज में खुद को खतरा बताते हुए एनकाउंटर की बात कह डाली।

गाड़ी में बीच में बैठने से क्या इनकार

पुलिस ने जेल से बाहर निकालने के बाद आजम खां को गाड़ी में बैठाया तो बीच में बैठने से मना करने लगे। बोले मैं बीमार हूं। बीच में नहीं बैठ सकता। मेरी उम्र का तो लिहाज कीजिए। सीओ रवि खोकर ने उनसे कई बार बीच में बैठने का आग्रह किया, लेकिन वह नहीं माने। बोले, अगर हाथ पैर तोड़ कर ले जाओ तो चला जाऊंगा, वर्ना बीच में नहीं बैठ पाऊंगा। इस पर पुलिस उन्हें खिड़की की साइड में बैठ कर ही ले गई। पुलिस वाले चाहते थे कि उनकी दोनों साइड में एक-एक पुलिसकर्मी तैनात हो। लेकिन, बाद में दो पुलिसकर्मियों को उनकी एक साइड में बैठना पड़ा।

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