ग्रामीणों का दावा—पहले भी हो चुका था हादसा, फिर भी नहीं रुका पटाखा निर्माण; जामो थानाध्यक्ष और चौकीदार निलंबित, जांच में जुटीं कई टीमें
सीवान। बिहार के सीवान जिले के आलमापुर गांव में पटाखे बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह पूरी तरह धराशायी हो गया। हादसे में प्रशासन ने अब तक पांच शव बरामद किए हैं, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि मृतकों की संख्या छह है। घटना में एक बच्ची भी घायल हुई है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है, वहीं अवैध पटाखा निर्माण और स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाके को सील कर दिया है। मलबा हटाने और संभावित रूप से दबे लोगों की तलाश के लिए जेसीबी की मदद ली जा रही है। पुलिस और प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। विस्फोट के कारणों का पता लगाने के साथ-साथ यह भी जांच की जा रही है कि मकान में पटाखा निर्माण के लिए वैध लाइसेंस था या नहीं और वहां कितनी विस्फोटक सामग्री रखी गई थी।
35 से 40 साल से पटाखे बनाने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, आलमापुर गांव में अमीरुद्दीन मियां के घर में पिछले 35 से 40 वर्षों से पटाखे बनाने का काम किया जा रहा था। ग्रामीणों का दावा है कि इस मकान में पहले भी पटाखा निर्माण के दौरान विस्फोट हो चुका है। करीब 26 साल पहले हुए उस हादसे में अमीरुद्दीन मियां के बेटे अमुरात और बिहारी महतो की मौत हो गई थी, जबकि अमीरुद्दीन मियां भी घायल हुए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले हुए हादसे के बावजूद यहां पटाखे बनाने का काम बंद नहीं हुआ। यदि स्थानीय लोगों के दावों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक विस्फोट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय से चल रहे पटाखा निर्माण, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी की भी जांच का विषय बनेगा।
हालांकि, पटाखा निर्माण की वास्तविक अवधि, इसकी वैधता और पूर्व में हुई घटना से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शादी-विवाह और त्योहारों पर होती थी पटाखों की मांग
स्थानीय मुखिया संघ के प्रतिनिधि जीव नारायण यादव के अनुसार, गांव के चार से पांच घरों में पटाखे बनाने का काम होता रहा है। उन्होंने बताया कि शादी-विवाह, छठ पूजा और मुहर्रम जैसे अवसरों पर पटाखों की मांग रहती थी। इसी मांग के कारण इस कारोबार से अच्छी आमदनी होती थी।
जीव नारायण यादव ने यह भी दावा किया कि करीब 10 वर्ष पहले प्रशासन ने पटाखा निर्माण से जुड़े मामले में छापेमारी की थी और गिरफ्तारी भी हुई थी। उनके मुताबिक, संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
इन दावों के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि गांव में लंबे समय से पटाखा निर्माण हो रहा था, तो इसकी नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। क्या संबंधित लोगों के पास विस्फोटक सामग्री रखने और पटाखे बनाने की अनुमति थी? क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? फिलहाल, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
मकान के पीछे धान के खेत से मिला बारूद
विस्फोट के बाद घटनास्थल और आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। मलबे को हटाकर विस्फोट से संबंधित सामग्री और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इसी दौरान अमीरुद्दीन मियां के मकान के पीछे स्थित धान के खेत से बारूद मिलने की जानकारी सामने आई है।
आशंका जताई जा रही है कि कार्रवाई के डर से कुछ लोगों ने बारूद या पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री खेतों में फेंक दी होगी। हालांकि, इस आशंका की अभी पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां बरामद सामग्री की पड़ताल कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किस प्रकार की थी और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
प्रशासन ने आसपास के मकानों की भी तलाशी शुरू कर दी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं दूसरे घरों में भी विस्फोटक सामग्री तो नहीं रखी गई थी। मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान जारी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच, कई टीमें जुटीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीवान के जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने जांच के निर्देश दिए हैं। घटनास्थल पर बम निरोधक दस्ता, फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल), डॉग स्क्वायड, अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग की टीमें साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।
इन टीमों के माध्यम से विस्फोट से संबंधित सामग्री की जांच, घटनास्थल की स्थिति का आकलन और हादसे के संभावित कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि विस्फोट किस प्रकार की सामग्री के कारण हुआ और घटनास्थल पर किन-किन पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
प्रशासन की ओर से मलबा हटाने और तलाशी अभियान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जांच एजेंसियां आसपास के क्षेत्र की भी पड़ताल कर रही हैं, ताकि किसी अन्य संभावित खतरे को दूर किया जा सके।
थानाध्यक्ष और चौकीदार निलंबित
घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने भी कार्रवाई की है। सीवान के पुलिस अधीक्षक भरत सोनी ने जामो थानाध्यक्ष धीरज कुमार और चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई को घटना के बाद पुलिस स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके अलावा, महराजगंज के एसडीपीओ अमन के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। टीम विस्फोट के कारणों, पटाखा निर्माण की गतिविधियों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
हालांकि, निलंबन की कार्रवाई अपने आप में किसी अधिकारी की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं करती। मामले में लापरवाही हुई या नहीं, इसका स्पष्ट निर्धारण जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
हादसे ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
आलमापुर गांव में हुए विस्फोट ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि पटाखा निर्माण का काम दशकों से चल रहा था और पहले भी इसी मकान में विस्फोट हो चुका था, तो ऐसी गतिविधियों की निगरानी क्यों नहीं हो सकी? क्या मकान में पटाखे बनाने का वैध लाइसेंस था? वहां कितनी विस्फोटक सामग्री रखी गई थी? क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था?
इन सवालों के साथ यह भी जांच का विषय है कि गांव के दूसरे घरों में पटाखा निर्माण की गतिविधियां किस हद तक चल रही थीं और पहले की गई प्रशासनिक कार्रवाई का क्या परिणाम निकला था।
फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में किसी अन्य व्यक्ति की तलाश, घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और विस्फोट के वास्तविक कारणों का पता लगाने की है। ग्रामीणों के छह लोगों की मौत के दावे और प्रशासन की ओर से पांच शव बरामद किए जाने की जानकारी के बीच मृतकों की अंतिम संख्या की भी आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी है।
जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ, इसमें किसकी लापरवाही रही और अवैध या असुरक्षित पटाखा निर्माण से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है। इस घटना ने एक बार फिर विस्फोटक सामग्री के भंडारण और पटाखा निर्माण पर प्रभावी निगरानी की जरूरत को सामने ला दिया है।
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