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शताब्दी वर्ष में पूर्णाहुति हवन के साथ संपन्न हुई बाई का बाग दुर्गा पूजा

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वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा की आराधना, नवमी पर विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

प्रयागराज। बाई का बाग दुर्गा पूजा बारवारी के ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना पूर्णाहुति हवन के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव के वातावरण में संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ हुए हवन में श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कर मां भगवती से सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। इस विशेष अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने नवमी का भोग-प्रसाद ग्रहण कर मां जगदम्बा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति हवन

बारवारी के शताब्दी वर्ष के आयोजन में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मां दुर्गा की आराधना की गई। पूर्णाहुति हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से आहुतियां अर्पित कीं और सभी के कल्याण की प्रार्थना की। आयोजन में बारवारी के अध्यक्ष श्रीधर जैन, चौधरी गयंत, जयंत जोशी, राजेश मलिक, टीपी मिश्रा, राजू द्विवेदी, अंकित सिंह, राजन यादव, लालू मित्तल, शशांक मित्तल, जयादीप गांगुली, सोना चटर्जी और जयदीप मुखर्जी सहित युवा कमेटी के पदाधिकारी तथा महिला मंडल की सदस्य मौजूद रहीं।

नवमी पर विशाल भंडारे का आयोजन

बारवारी के मीडिया प्रभारी लालू मित्तल ने बताया कि पूर्णाहुति हवन संपन्न होने के बाद कमेटी की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि नवमी के पावन अवसर पर बारवारी की ओर से प्रतिवर्ष भंडारा कराया जाता है। इसमें श्रद्धालु मां दुर्गा का भोग-प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अगले वर्ष फिर मां के आगमन की प्रार्थना करते हैं।

उन्होंने बताया कि बाई का बाग दुर्गा पूजा बारवारी का शताब्दी वर्ष सभी श्रद्धालुओं और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह ऐतिहासिक अवसर धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

आस्था और सामाजिक सद्भाव का संदेश

शताब्दी वर्ष के इस आयोजन में पूर्णाहुति हवन और विशाल भंडारे के माध्यम से भक्तों ने मां जगदम्बा के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनाए रखने की मंगलकामना की।

लालू मित्तल ने कहा कि मां दुर्गा की कृपा से पूरा आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सद्भाव के संदेश के साथ संपन्न हुआ। बारवारी का शताब्दी वर्ष धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर रहा।

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