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75 लाख की नौकरी, 30 करोड़ की संपत्ति! हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा

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परिवार के नाम पर फर्मों में करोड़ों के लेन-देन की जांच, जमीनों के सौदों से लेकर रियल एस्टेट निवेश तक खंगाल रही टीम

इंदौर/देवास। मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई ने एक प्रधान आरक्षक की संपत्ति को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में तैनात प्रधान आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच में करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्ति का शुरुआती आकलन किया गया है। लोकायुक्त के मुताबिक, यह उसकी अनुमानित आय से लगभग 568 फीसदी अधिक है। बुधवार सुबह इंदौर और देवास में 15 ठिकानों पर एक साथ शुरू हुई तलाशी में जमीन, मकान, प्लॉट, कारोबारी फर्मों और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

1.93 करोड़ की अनुमानित आय, संपत्ति करीब 30 करोड़

लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के अनुसार, फिरोज खान को नौकरी के दौरान वेतन से करीब 75 लाख रुपये मिलने का अनुमान है। अन्य स्रोतों से होने वाली आय को जोड़कर उसकी कुल अनुमानित आय करीब 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले शुरुआती जांच में करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्ति सामने आने की बात कही गई है।

लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने बुधवार सुबह करीब छह बजे कार्रवाई शुरू की। देवास में 11 और इंदौर में चार ठिकानों पर तलाशी ली गई। जांच एजेंसी अब संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक खातों के लेन-देन, निवेश और जमीनों की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी में मिले दस्तावेजों और संपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन के बाद आंकड़ों में बदलाव संभव है।

परिवार के नाम पर फर्म, करोड़ों के लेन-देन की जांच

जांच में फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम पर संचालित साहिल ट्रेडिंग नाम की फर्म सामने आने की जानकारी मिली है। इस फर्म के बैंक खाते में करोड़ों रुपये के लेन-देन की बात कही गई है। लोकायुक्त यह पता लगाने में जुटी है कि फर्म किस तरह का कारोबार करती थी, उसमें पैसा कहां से आया और उसका इस्तेमाल किन संपत्तियों को खरीदने में हुआ।

इसके अलावा, फिरोज की परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर रोशनी सेल्स एंड सर्विस फर्म संचालित होने की जानकारी भी जांच के दायरे में है। जमीन खरीदने में कथित भूमिका सामने आने के बाद लोकायुक्त ने रोशनी वर्मा को भी आरोपी बनाया है।

जांच में रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की फर्म के जरिए रियल एस्टेट में निवेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। लोकायुक्त इन फर्मों के दस्तावेजों, बैंक खातों और संपत्तियों की खरीद के बीच संबंध तलाश रही है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि इन कारोबारों का वास्तविक संचालन कौन करता था और संपत्ति खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था।

देवास में जमीनों के सौदों की भी पड़ताल

फिरोज खान पर आरोप है कि वह पुलिस विभाग में होने का रौब दिखाकर देवास में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में दखल देता था। उस पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का सौदा कराने और परिवार के सदस्यों तथा परिचित महिलाओं के नाम पर संपत्तियां खरीदने के आरोप भी हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

लोकायुक्त की जांच में देवास के इटावा क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी भी शामिल है। इसके साथ ही प्लॉट, मकान और व्यावसायिक संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन संपत्तियों की खरीद में किसने पैसा लगाया, भुगतान कहां से हुआ और दस्तावेजों में दर्ज मालिकाना हक के पीछे वास्तविक निवेशक कौन था।

देवास में लंबे समय तक तैनाती भी जांच के दायरे में

फिरोज खान मूल रूप से उज्जैन का रहने वाला है। उसके पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे। पिता का तबादला होने के बाद परिवार देवास आ गया, जहां फिरोज की पढ़ाई हुई। बाद में वह पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर भर्ती हुआ। वर्ष 2002 में उसकी तैनाती देवास में हुई और नौकरी का अधिकांश समय वहीं बीता।

इस दौरान उसके कई तबादले हुए, लेकिन अधिकारियों के साथ अटैचमेंट और चालक की ड्यूटी के कारण वह लंबे समय तक देवास में तैनात रहा। उसने सीएसपी स्तर के अधिकारियों समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के वाहन भी चलाए और पुलिस लाइन में भी उसकी तैनाती रही। करीब दो साल पहले उसका तबादला इंदौर हो गया, जहां फिलहाल वह पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ है।

बताया जाता है कि चालक की ड्यूटी के दौरान वह अक्सर वर्दी में नजर नहीं आता था। हालांकि, उसके तबादलों और अटैचमेंट से जुड़ी पूरी स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी। लोकायुक्त अब देवास में उसकी लंबी तैनाती के दौरान खरीदी गई संपत्तियों और उनके भुगतान के स्रोतों की पड़ताल कर रही है।

संपत्तियों और आय के स्रोतों का मिलान करेगी लोकायुक्त

जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि फिरोज खान की सरकारी नौकरी से हुई कमाई, अन्य घोषित आय और सामने आई संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। यदि संपत्ति किसी अन्य कारोबार की कमाई से खरीदने का दावा किया जाता है, तो संबंधित कारोबार, आय के स्रोत और दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।

परिवार के सदस्यों और परिचितों के नाम पर मिली संपत्तियों के साथ-साथ कारोबारी फर्मों के बैंक खातों की पड़ताल भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्ति का आंकड़ा शुरुआती आकलन पर आधारित है। तलाशी में मिले दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संपत्तियों के मूल्यांकन के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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