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सपा को बड़ा झटका, तीन विधायक भाजपा में शामिल

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2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी; 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद से सपा नेतृत्व से चल रही थी दूरी

अमेठी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। समाजवादी पार्टी के तीन विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। अमेठी में आयोजित सदस्यता ग्रहण समारोह में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी, अमर पाल मौर्य समेत कई वरिष्ठ नेता, मंत्री और पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। तीन विधायकों के भाजपा में आने को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

भाजपा में शामिल होने वाले तीनों विधायक अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। राकेश प्रताप सिंह अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट, अभय सिंह अयोध्या जिले की गोसाईंगंज सीट और विनोद चतुर्वेदी जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं। तीनों वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

2024 के राज्यसभा चुनाव में शुरू हुई थी बगावत

तीनों विधायकों की सपा से दूरी की प्रमुख वजह फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान सामने आई बगावत को माना जाता है। उस समय सपा के कुछ विधायकों ने पार्टी के रुख से अलग जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के नाम भी इस घटनाक्रम से जुड़े रहे।

इसके बाद पार्टी नेतृत्व और इन विधायकों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती गई। राकेश प्रताप सिंह को जून 2025 में सपा से निष्कासित कर दिया गया था। अभय सिंह भी पार्टी से निष्कासित किए गए विधायकों में शामिल थे। तीनों के भाजपा में शामिल होने से अब उनकी राजनीतिक भूमिका और संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

तीनों विधायकों का अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभाव

राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार वर्ष 2012, 2017 और 2022 में विधायक चुने गए। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद वह प्रदेश की राजनीति में चर्चा में आए थे। उनके भाजपा में शामिल होने से अमेठी जिले की राजनीति पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

अभय सिंह अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह वर्ष 2012 में पहली बार विधायक चुने गए थे और 2022 में फिर विधानसभा पहुंचे। वहीं विनोद चतुर्वेदी जालौन जिले की कालपी सीट से विधायक हैं। वह वर्ष 2007 और 2022 में इस सीट से जीत चुके हैं।

तीनों नेताओं का राजनीतिक आधार अलग-अलग क्षेत्रों में होने के कारण भाजपा के लिए यह कदम अवध से लेकर बुंदेलखंड तक संगठनात्मक और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव आगामी समय में ही स्पष्ट होगा।

सदस्यता समारोह में भाजपा के कई बड़े नेता रहे मौजूद

अमेठी में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और स्मृति ईरानी की मौजूदगी विशेष रूप से चर्चा में रही। इनके अलावा अमर पाल मौर्य सहित कई वरिष्ठ नेता, मंत्री और पदाधिकारी भी समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम को लेकर पहले से तैयारियां की गई थीं और बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा समर्थकों के पहुंचने की जानकारी भी सामने आई थी।

भाजपा के लिए यह कार्यक्रम केवल तीन नेताओं के पार्टी में शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों से आए नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर, सपा के लिए यह घटनाक्रम उसके विधायकों के पार्टी से अलग होने की राजनीतिक प्रक्रिया का एक और अहम पड़ाव है।

भाजपा में शामिल होने के फैसले के पीछे विकास का मुद्दा

मीडिया से बातचीत के दौरान विनोद चतुर्वेदी ने भाजपा में शामिल होने के फैसले के पीछे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के विकास कार्यों तथा नेतृत्व के प्रति विश्वास को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने सरकारी योजनाओं के लाभ में भेदभाव नहीं होने की बात भी कही।

राकेश प्रताप सिंह ने भी अपने समर्थकों के समर्थन का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, क्षेत्र के लोगों ने उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है। इन नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि वे अपने फैसले को विकास, नेतृत्व और समर्थकों की अपेक्षाओं से जोड़कर पेश कर रहे हैं।

2027 के चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में तीन विधायकों का भाजपा में शामिल होना सपा और भाजपा, दोनों के लिए राजनीतिक दृष्टि से अहम है। भाजपा को उम्मीद है कि इन नेताओं के स्थानीय प्रभाव से संबंधित क्षेत्रों में संगठन को मजबूती मिल सकती है। वहीं सपा के सामने अपने संगठन और समर्थक आधार को मजबूत बनाए रखने की चुनौती रहेगी।

हालांकि, किसी नेता के दल बदलने से चुनावी परिणामों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी तय नहीं है। इसका आकलन संबंधित क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं के रुख और आगामी चुनावी परिस्थितियों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

कुल मिलाकर, अमेठी में आयोजित सदस्यता समारोह के जरिए राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी ने भाजपा का दामन थाम लिया है। 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद से सपा से उनकी बढ़ती दूरी अब औपचारिक राजनीतिक बदलाव में बदल गई है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम पर प्रदेश की राजनीति में नजर बनी रहेगी।

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