वैशाली के नाव हादसे ने छीन लीं घर-आंगन की किलकारियां, जर्जर नाव और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल; पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये मुआवजे की बात
हाजीपुर/पटना। जिन घरों में बच्चों की हंसी गूंजती थी, जहां उनके लौटने का इंतजार था और जहां दशहरा की खुशियों के बीच जिंदगी अपने सामान्य रंगों में आगे बढ़ रही थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत में नाव हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। मंगलवार रात हुए इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की डूबने से मौत की खबर ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। बुधवार को जब मासूमों की अर्थियां गांव की गलियों से निकलीं, तो हर तरफ चीख-पुकार और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
किसी मां की गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई, तो कोई पिता अपने कलेजे के टुकड़े को खोने के गम में बेसुध नजर आया। जिन बच्चों को परिवार के लोग कुछ देर बाद लौट आने की उम्मीद में विदा कर रहे थे, वे अब कभी घर वापस नहीं आएंगे। गांव की गलियों से एक साथ कई बच्चों की अर्थियां उठती देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। इस त्रासदी ने सिर्फ परिवारों से उनके बच्चे नहीं छीने, बल्कि उनके साथ जुड़े सपनों, उम्मीदों और भविष्य की खुशियों को भी छीन लिया।

एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत, दूसरे घर के पांच चिराग बुझे
इस हादसे की सबसे हृदयविदारक तस्वीर तब सामने आई, जब एक ही परिवार के सात बच्चों के शव उठे। दूसरे परिवार के पांच बच्चों की मौत ने परिजनों को भीतर तक तोड़ दिया, जबकि तीसरे परिवार का एक बच्चा भी इस दुर्घटना में जान गंवा बैठा। एक साथ इतने बच्चों की मौत से पूरा गांव सदमे में है। किसी घर में मां-बाप अपने बच्चों की याद में रो रहे हैं, तो कहीं परिवार के दूसरे सदस्य अपनों को ढांढस बंधाने की कोशिश करते हुए खुद अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।
जिन आंगनों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब अपनों के बिछड़ने की चीखें सुनाई दे रही हैं। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। गांव का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसकी आंखें इस हादसे के बाद नम न हुई हों। गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ऐसा सामूहिक दुख है, जिसकी टीस लंबे समय तक बनी रहेगी।
भोज में शामिल होने निकले थे, रास्ते में मौत ने घेरा
जानकारी के मुताबिक, रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में एक घर पर भोज का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए गांव के करीब 20 लोग एक छोटी और जर्जर नाव पर सवार होकर ढाब के दूसरी ओर जा रहे थे। बताया गया कि नाव बीच पानी में पहुंची तो अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव पर सवार लोग गहरे पानी में डूबने लगे। देखते ही देखते मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से डूबे लोगों की तलाश शुरू की गई। बुधवार को भी बचाव अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई। इस दुर्घटना में 13 लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। जिन परिवारों के बच्चे भोज में शामिल होने गए थे, उन्हें क्या पता था कि कुछ समय बाद उनके घरों में खुशियों की जगह ऐसा मातम छा जाएगा, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।

जर्जर नाव को लेकर ग्रामीणों के सवाल
हादसे के बाद नाव की हालत और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दुर्घटनाग्रस्त नाव लंबे समय से जर्जर अवस्था में थी। उनका कहना है कि नाव बदलने के लिए संबंधित अधिकारियों को पहले भी आवेदन दिए गए थे, लेकिन शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि नाव की स्थिति पर समय रहते ध्यान दिया गया होता, तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था।
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भी शुरुआती जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नाव में पहले से छेद होने की बात सामने आई है। हालांकि, नाव की वास्तविक स्थिति, दुर्घटना के कारणों और ग्रामीणों की शिकायतों पर कार्रवाई हुई थी या नहीं, इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे ने नदी और ढाब पार करने वाले लोगों के लिए सुरक्षित नावों, नियमित रखरखाव और सुरक्षा नियमों के पालन की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
रात में नाव परिचालन पर भी उठे सवाल
मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि प्रशासन शाम के बाद नावों के परिचालन की अनुमति नहीं देता है। इसके बावजूद नाव चलाई गई, तो यह नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत बताई।
घटना की परिस्थितियों, नाव के परिचालन के समय और सुरक्षा नियमों के पालन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि नाव की जर्जर हालत की शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए थे और दुर्घटना के समय सुरक्षा के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं। इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये मुआवजे की बात
रामकृपाल यादव ने हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से प्रभावित परिवारों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारी तय करने की अपील की।
मंत्री ने यह भी कहा कि राघोपुर विपक्ष के नेता का निर्वाचन क्षेत्र है। ऐसे में उन्हें पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनके दुख में शामिल होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष के नेता लौटने के बाद प्रभावित लोगों से मुलाकात करेंगे।
शोक में डूबा गांव, जवाबदेही की उम्मीद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से भी हादसे पर शोक व्यक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस बीच पूरे गांव की निगाहें राहत, सहायता और जांच की कार्रवाई पर टिकी हैं। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को भविष्य के सपनों के साथ बड़ा होते देखने की उम्मीद की थी, वे अब अपनों को खोने के असहनीय दर्द से गुजर रहे हैं।

राघोपुर की इस त्रासदी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले साधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। यदि नाव जर्जर थी और उसे बदलने के लिए आवेदन दिए गए थे, तो उन शिकायतों की जांच कर सच्चाई सामने लाना भी आवश्यक है। हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी का निर्धारण ही पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में जरूरी कदम होंगे।
फिलहाल रामपुर श्यामचंद में हर तरफ गम का माहौल है। जिन घरों के दरवाजे बच्चों की वापसी की राह देख रहे थे, वहां अब ऐसी खामोशी है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। कई परिवारों के लिए यह दुख कभी पूरी तरह कम नहीं होगा। गांव की गलियों से उठीं मासूमों की अर्थियां पीछे एक ऐसा सवाल छोड़ गई हैं—क्या समय रहते सुरक्षा पर ध्यान दिया गया होता, तो इन घरों की खुशियां बचाई जा सकती थीं?
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