अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत, 15 अक्टूबर से धान व मोटे अनाज के क्रय केंद्र खुलेंगे; मकान क्षति पर अलग से मिलेगी सहायता
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर से प्रदेश के आपदा प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देते हुए 9,18,091 किसानों के बैंक खातों में 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजी। बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह राशि कृषि निवेश अनुदान के रूप में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को राहत पहुंचाने में देरी नहीं कर रही है। आपदा से फसल, मकान और पशुधन को हुए नुकसान का मुआवजा आठ से दस दिन के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बरसात के दौरान अब तक आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग एक हजार करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य संकट के समय अन्नदाता किसानों को आर्थिक संबल देना और यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे उनके खातों में पहुंचे।
‘पहले बिजली नहीं आती थी, बिल आता था’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बिजली की स्थिति ऐसी थी कि बिजली आती नहीं थी, लेकिन बिल जरूर आता था। अब स्थिति बदल गई है और किसानों को बिजली मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान किसानों के लिए भेजी गई सहायता राशि का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता था, जबकि मौजूदा सरकार में पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रहा है।
योगी ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर जिन जिलों की रिपोर्ट प्राप्त हुई, वहां प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी किसान के लिए 25 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत होती है, तो उसके खाते में पूरी राशि पहुंचेगी। सरकार ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सीधे बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित किया है।
मकान क्षतिग्रस्त होने पर अलग से मिलेगी सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़, अतिवृष्टि और चक्रवात के कारण जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1.20 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई गई है। यह राशि फसल क्षति के लिए दी जा रही 493 करोड़ रुपये की सहायता से अलग है। पूरी तरह नष्ट हुए मकानों के प्रभावित परिवारों को तत्काल आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पशुधन की क्षति होने पर भी नियमानुसार सहायता दी जाएगी। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
हुदहुद चक्रवात की सहायता को लेकर पिछली सरकार पर आरोप
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014 में आए हुदहुद चक्रवात का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय केंद्र से किसानों की सहायता के लिए 3,200 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन किसानों तक केवल 800 करोड़ रुपये ही पहुंचे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इस मामले की स्थिति की जांच कराई गई और प्रभावित किसानों को सहायता देने के लिए अलग से धनराशि की व्यवस्था की गई। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर किसानों के हितों की अनदेखी करने और समाज को जाति के नाम पर बांटने का आरोप भी लगाया।
क्षतिग्रस्त सड़कों और बाढ़ कटान की मरम्मत के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में कटान रोकने और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जाए। अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कर आवागमन जल्द बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि आपदा के कारण सड़कों, सिंचाई व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को हुए नुकसान की भरपाई के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। मौसम साफ होते ही संबंधित विभागों को मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 15 अक्टूबर से अतिवृष्टि प्रभावित जिलों में धान और मोटे अनाज की खरीद के लिए क्रय केंद्र खोले जाएंगे, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।
कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, प्रदीप शुक्ला, डॉ. विमलेश पासवान, महेंद्र पाल सिंह, श्रवण कुमार निषाद और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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