अखिलेश यादव के आगमन पर पैतृक गांव गोसाईपुर में जुटे शिक्षामित्र, अधिकारों की लड़ाई और संगठन की एकजुटता बनाए रखने का लिया संकल्प
संजीव सिंह,बलिया। शिक्षामित्रों के संघर्ष, सम्मान और अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के तेरहवीं संस्कार के अवसर पर बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव गोसाईपुर में श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षामित्र, संगठन के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग पहुंचे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आगमन पर कार्यक्रम स्थल पर शिक्षामित्रों की भारी भीड़ जुटी। उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय चौधरी को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया और शिक्षामित्र समाज की एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया।
शिक्षामित्रों के बीच रामगोविंद चौधरी को एक ऐसे जननेता के रूप में याद किया गया, जिन्होंने उनके संघर्ष को आवाज देने और सम्मान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए। कार्यक्रम में वक्ताओं और शिक्षामित्र साथियों ने कहा कि चौधरी ने शिक्षामित्रों को सम्मान के साथ ‘गुरुजी’ कहकर संबोधित करने की पहचान दिलाई। उनके निधन से शिक्षामित्र समाज ने अपना एक मजबूत अभिभावक और सहारा खो दिया है।
‘शिक्षामित्र खाली हाथ, हो गए अब अनाथ’ के नारों से छलका दर्द
श्रद्धांजलि सभा के दौरान शिक्षामित्रों ने भावुक होकर कहा कि स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी उनके लिए केवल एक नेता नहीं, बल्कि अभिभावक की तरह थे। उनके जाने से शिक्षामित्र समाज स्वयं को असहाय महसूस कर रहा है। इसी भावना को व्यक्त करते हुए साथियों ने नारा लगाया—‘शिक्षामित्र खाली हाथ, हो गए अब अनाथ।’

शिक्षामित्रों ने कहा कि चौधरी ने उनके संघर्ष और समस्याओं को गंभीरता से उठाया तथा उनके सम्मान और अधिकारों की बात की। ऐसे समय में जब शिक्षामित्र समाज विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनका जाना एक बड़ी क्षति है। उपस्थित साथियों ने उनके विचारों और संघर्षों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिक्षामित्र परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर जताई चिंता
कार्यक्रम में उन शिक्षामित्रों को भी याद किया गया, जो समय से पहले दुनिया छोड़कर चले गए। साथियों ने कहा कि अनेक शिक्षामित्रों के निधन के बाद उनके परिवार आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ऐसे परिवारों की स्थिति को समझना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करना समाज तथा व्यवस्था, दोनों की जिम्मेदारी है।
सभा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शिक्षामित्रों के परिवारों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके दुख और कठिनाइयों को समझते हुए संगठन को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए, ताकि शिक्षामित्र समाज से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सके।
मतभेद भुलाकर एकजुट रहने की अपील
श्रद्धांजलि सभा में शिक्षामित्रों से आपसी मतभेदों और व्यक्तिगत अहंकार से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत बनाने की अपील की गई। साथियों ने कहा कि शिक्षामित्र समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। यदि सभी लोग एकजुट रहेंगे, तभी अधिकारों, सम्मान और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर मजबूती से अपनी बात रख सकेंगे।
कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर अनावश्यक विवाद और अपमानजनक टिप्पणियों से बचने की सलाह भी दी गई। शिक्षामित्रों से आग्रह किया गया कि वे व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में उलझने के बजाय संगठन की मजबूती और समाज के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करें। साथियों ने कहा कि स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके संघर्ष, विचारों और एकता के संदेश को आगे बढ़ाया जाए।
प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक के पदाधिकारी रहे मौजूद
तेरहवीं संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश महामंत्री सुशील यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष अजय सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश साहनी तथा स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा सहित अनेक पदाधिकारी और शिक्षामित्र साथी मौजूद रहे।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के आजमगढ़ मंडल के संरक्षक सरल यादव, महामंत्री भरत यादव, मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव सिंह और मंडल कोषाध्यक्ष दिलीप प्रसाद ने भी सहभागिता की। बलिया जिले के संघ पदाधिकारी और विभिन्न ब्लॉकों से आए शिक्षामित्रों ने कार्यक्रम में पहुंचकर स्वर्गीय चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में जिला मंत्री अजय श्रीवास्तव, जिला प्रवक्ता निर्भय राय, फैसल अजीज, अरविंद कुमार, हरीश शुक्ला, अजय भारद्वाज, तेज नारायण सिंह, अश्वनी राय, मनोज यादव, सिद्धेश्वर राय, अशोक यादव, हरेंद्र वर्मा, अरविंद चौधरी, संजय पासवान, मुकेश राय, रंजना सिंह, देवानंद राम, नागेंद्र यादव, सनोज, सुनील राम, प्रयाग सिंह, छोटेलाल चौधरी, देवनाथ यादव ‘गुड्डन’, प्रेम राय, अनिल यादव, रणजीत यादव, लाल बाबू, मिंटू यादव, अजय प्रताप वर्मा, हरिओम मौर्य, नरेंद्र वर्मा, लियाकत, अनुप, नसीम, उदय वर्मा ‘बब्लू’, बृजेश यादव, राजकुमार यादव, सुनील राय, राजेश कुमार यादव ‘मुन्ना’, राम ईश्वर, संतोष यादव, वीरेंद्र राजभर, सुनील गुप्ता, धनंजय, नवीन, पंकज राय और प्रदीप यादव सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र साथी उपस्थित रहे।

सहयोगियों के प्रति जताया आभार
कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से श्रद्धांजलि सभा और तेरहवीं संस्कार में शामिल होने वाले सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। विशेष रूप से उन शिक्षामित्रों का धन्यवाद किया गया, जिन्होंने अपने व्यस्त समय से अवसर निकालकर कार्यक्रम में भाग लिया और इस दुख की घड़ी में परिवार तथा शिक्षामित्र समाज के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
आयोजकों ने कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों की मौजूदगी संगठन की एकजुटता और स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि शिक्षामित्रों के हितों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
‘आदमी चला जाता है, कीर्ति अमर होती है’
श्रद्धांजलि सभा में स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के योगदान को याद करते हुए कहा गया कि व्यक्ति भले ही दुनिया से चला जाता है, लेकिन उसके विचार, कार्य और समाज के प्रति समर्पण लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करते रहते हैं। शिक्षामित्रों के संघर्ष, सम्मान और अधिकारों के लिए उनके प्रयासों को आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।
कार्यक्रम में शिक्षामित्रों ने संकल्प लिया कि वे अपने अभिभावक स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के विचारों और संघर्ष की विरासत को कमजोर नहीं होने देंगे। संगठन की एकता बनाए रखते हुए शिक्षामित्रों के हक, अधिकार और सम्मान के लिए आवाज उठाते रहेंगे।सभा का समापन स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी को श्रद्धांजलि देते हुए ‘शिक्षामित्रों के मसीहा रामगोविंद चौधरी अमर रहें’, ‘शिक्षामित्र एकता जिंदाबाद’ और ‘हमारा संघर्ष जिंदाबाद’ जैसे नारों के साथ हुआ।
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