पुणे के पास डोणजे स्थित फार्महाउस पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत राजनीति और फिल्म जगत की हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
पुणे। दमदार आवाज, बेबाक संवाद अदायगी और किरदारों में जान फूंक देने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को शुक्रवार को पुणे के पास डोणजे स्थित उनके फार्महाउस पर शासकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पुलिस दल ने सलामी देकर इस दिग्गज कलाकार को आखिरी सम्मान दिया। अपने प्रिय अभिनेता के अंतिम दर्शन के लिए प्रशंसकों और शुभचिंतकों की भारी भीड़ उमड़ी। माहौल गमगीन था और हर कोई अपने चहेते कलाकार को अंतिम बार देखने के लिए भावुक नजर आया।
नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा में शोक की लहर है। दशकों तक अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले नाना का जाना फिल्म जगत के लिए एक बड़ा खालीपन छोड़ गया है। उन्होंने पर्दे पर ऐसे अनेक किरदार निभाए, जिनकी छाप लंबे समय तक दर्शकों के मन में बनी रहेगी।
गोवा से पुणे लाया गया पार्थिव शरीर
नाना पाटेकर का निधन गोवा के डोना पावला स्थित उनके आवास पर तबीयत बिगड़ने के बाद हुआ। उन्हें दिल का दौरा पड़ने की जानकारी सामने आई थी। हालत गंभीर होने पर उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनका पार्थिव शरीर विमान से गोवा से पुणे लाया गया। पुणे हवाई अड्डे से पार्थिव शरीर को डोणजे स्थित फार्महाउस पहुंचाया गया, जहां अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई थी। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कई प्रशंसक अपने प्रिय अभिनेता को आखिरी बार देखकर भावुक हो गए।
मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
नाना पाटेकर को अंतिम विदाई देने के लिए राजनीतिक, सामाजिक और फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियां डोणजे पहुंचीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे हवाई अड्डे और डोणजे में उनके अंतिम दर्शन किए। उन्होंने दिवंगत अभिनेता के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इनके अलावा मंत्री चंद्रकांत पाटील, केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल, रामदास आठवले, सुनील तटकरे, माधुरी मिसाळ, विधायक गोपीचंद पडळकर, अर्जुन खोतकर, रुपाली चाकणकर, सदाभाऊ खोत और उदय सामंत सहित अनेक नेताओं ने नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी।
फिल्म जगत से अभिनेता मकरंद अनासपुरे, निर्देशक नागराज मंजुळे, अभिनेत्री नीना कुलकर्णी, अभिनेता-निर्देशक प्रवीण तरडे, गायक सुरेश वाडकर, पुरुषोत्तम बेर्डे और सुशांत शेलार समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। लेखक अरविंद जगताप और ‘नाम’ फाउंडेशन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
संघर्ष से बनाई अभिनय की अलग पहचान
नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया। वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में विविध भूमिकाएं निभाईं और अपनी प्रभावशाली अदाकारी से दर्शकों तथा समीक्षकों का ध्यान खींचा।
वर्ष 1989 में आई फिल्म ‘परिंदा’ उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद ‘अंगार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी : द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी प्रतिभा साबित की।
‘क्रांतिवीर’ में उनके दमदार अभिनय को खूब सराहना मिली। वहीं, मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में गणपतराव बेलवलकर की भूमिका ने उनके अभिनय की गहराई और भावनात्मक क्षमता को सामने रखा। दूसरी ओर, फिल्म ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार के जरिए उन्होंने हास्य अभिनय का ऐसा रंग दिखाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।
संवादों में धार, अभिनय में सच्चाई
नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खासियत उनका स्वाभाविक और प्रभावशाली अभिनय था। वह जिस किरदार को निभाते थे, उसमें अपनी आवाज, चेहरे के भाव और संवादों की अदायगी से जान डाल देते थे। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य किरदारों तक उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
उनकी अदाकारी में बनावटीपन कम और भावनाओं की सच्चाई अधिक दिखाई देती थी। यही वजह रही कि उनकी कई फिल्में और संवाद आज भी दर्शकों के बीच याद किए जाते हैं। हिंदी और मराठी सिनेमा में उनका योगदान उन्हें अपने दौर के विशिष्ट कलाकारों में शामिल करता है।
तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित
नाना पाटेकर को उनके उल्लेखनीय अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। अभिनय के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों ने उन्हें फिल्म जगत में विशिष्ट स्थान दिलाया।
हालांकि, नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वह सामाजिक मुद्दों के प्रति भी संवेदनशील रहे और जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार काम करते रहे।
किसानों की मदद के लिए भी याद किए जाएंगे
नाना पाटेकर ने सामाजिक कार्यों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण समुदायों की समस्याओं को सामने लाने का प्रयास किया। ‘नाम’ फाउंडेशन के जरिए उन्होंने किसानों और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मदद के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका यह पक्ष बताता है कि वह पर्दे पर निभाए जाने वाले किरदारों से आगे बढ़कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी महत्व देते थे।
उनके सामाजिक कार्यों ने उन्हें प्रशंसकों के बीच एक अलग पहचान दिलाई। अभिनय के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों के लिए उनका योगदान भी उनकी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।
यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे नाना
नाना पाटेकर की अंतिम विदाई के दौरान डोणजे में जुटी भीड़ उनके प्रति लोगों के लगाव की झलक दिखा रही थी। पुलिस की सलामी और शासकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई, लेकिन उनके अभिनय की यादें दर्शकों के बीच हमेशा बनी रहेंगी।
एक ऐसा कलाकार, जिसकी आवाज में वजन, संवादों में धार और अभिनय में गहरी संवेदना थी, अब दर्शकों के बीच नहीं रहा। ‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ और ‘नटसम्राट’ तक उनके निभाए किरदार भारतीय सिनेमा की यादगार प्रस्तुतियों में शामिल रहेंगे। नाना पाटेकर का जाना फिल्म जगत के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी कला, सामाजिक योगदान और यादगार भूमिकाएं उन्हें आने वाली पीढ़ियों के बीच जीवित रखेंगी।
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