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जानवरों की सुरक्षा के लिए कानून है, तो सामान्य वर्ग के बच्चों को संवैधानिक सुरक्षा क्यों नहीं: सूरज प्रसाद चौबे

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लखनऊ। सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने ग्राम तरावा पहुंचकर नन्हे पांडेय जी की दिवंगत माता जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिजनों से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की। इस दौरान उनके साथ जिलाध्यक्ष पंकज कुमार शुक्ला, अमित चौबे, शशांक, अखिलेश कुमार और राजू पाण्डेय समेत कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि सभा के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सूरज प्रसाद चौबे ने केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “देश में जानवरों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सख्त कानून बने हुए हैं, तो फिर सामान्य वर्ग के बच्चों को संवैधानिक सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही?”

चौबे ने हालिया न्यायिक फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की एनएसए (NSA) के तहत हिरासत रद्द करते हुए 10 लाख रुपये का जुर्माना (कॉस्ट) लगाया है। लेकिन इसके विपरीत, एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) के फर्जी मुकदमे में 20 साल जेल काटने वाले विष्णु तिवारी के मामले में आज तक किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई और न ही उन्हें कोई मुआवजा मिला। कानून के मानक हर नागरिक के लिए समान होने चाहिए। जब किसी निर्दोष की स्वतंत्रता गलत तरीके से छीनी जाती है, तो उसके नुकसान की भरपाई और शासन की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।

बीजेपी सरकार को ‘सवर्ण विरोधी’ करार देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी पहले हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रही थी और अब सवर्णों व दलितों को आपस में लड़ाने का काम कर रही है। सवर्ण समाज जो कभी बीजेपी का कोर वोटर माना जाता था, आज उसके अस्तित्व को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में पीजी एडमिशन के दौरान 91 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी गई थीं, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई। इसके बावजूद योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, जहां सर्वोच्च अदालत ने भी इस 91 फीसदी आरक्षण को पूरी तरह से गलत ठहराया।

अंत में सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग बंद करने, यूजीसी नियमों को वापस लेने और आरक्षण प्रणाली में समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आगामी 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी सरकार का सत्ता से बाहर होना तय है। उन्होंने सवर्ण समाज से एकजुट होकर अपना विकल्प खुद बनने का आह्वान किया।

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