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3,800 करोड़ के लीजबैक घोटाले में PCS अधिकारी बर्खास्त, नोएडा में नियमों को ताक पर रखकर बांटी गई जमीन!

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नोएडा प्राधिकरण में सचिव रहते बाहरी लोगों और निजी कंपनियों को जमीन लीजबैक करने का आरोप, 15 साल बाद गिरी गाज; IAS प्रमोशन भी जांच के चलते था अटका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तहत वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान कथित तौर पर हुए करीब 3,800 करोड़ रुपये के लीजबैक घोटाले में उनकी भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक ने बर्खास्तगी के आदेश जारी किए

आरोप है कि किसानों के लिए आरक्षित जमीन को नियमों को दरकिनार कर बाहरी लोगों और निजी कंपनियों के नाम लीजबैक कर दिया गया था।1997 बैच के वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र वर्तमान में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज की ओर से उनकी बर्खास्तगी के आदेश जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।

किसानों के नाम पर आरक्षित जमीन निजी कंपनियों को देने का आरोप

मामला वर्ष 2011 का है, जब हरीश चंद्र नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात थे। आरोप है कि इस दौरान ग्राम शहदरा के सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 में आने वाली करीब 3,81,527 वर्ग मीटर अर्जित भूमि को नियमों के विपरीत बाहरी लोगों और निजी कंपनियों के नाम लीजबैक कर दिया गया।

प्रति परिवार अधिकतम 450 वर्ग मीटर जमीन देने का प्रावधान था

नियमों के मुताबिक, लीजबैक की सुविधा केवल स्थानीय गांव के पात्र किसानों के लिए निर्धारित थी। इसके तहत प्रति परिवार अधिकतम 450 वर्ग मीटर जमीन देने का प्रावधान था। लेकिन विभागीय जांच में कथित तौर पर सामने आया कि नियमों को दरकिनार कर निजी कंपनियों को 15 हजार वर्ग मीटर से अधिक के भूखंड आवंटित किए गए। इन भूखंडों की बाजार कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

2013 से चल रही थी कार्रवाई, अब बर्खास्तगी

हरीश चंद्र के खिलाफ वर्ष 2013 से ही अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की जा रही थी। मामले की जांच नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रितु माहेश्वरी ने की थी। लंबी विभागीय प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की अंतिम मंजूरी मिलने पर सरकार ने बर्खास्तगी का फैसला लिया।इस मामले में विभागीय जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही। अब सरकार के आदेश के बाद हरीश चंद्र की सेवा समाप्त कर दी गई है।

जांच के चलते अटका था IAS में प्रमोशन

बताया गया है कि लीजबैक प्रकरण में चल रही जांच के कारण हरीश चंद्र का भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में पदोन्नति का मामला भी अटका हुआ था। उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई लंबित रहने के चलते पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।

लीजबैक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए

नोएडा की जमीनों से जुड़े इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी की बर्खास्तगी ने प्राधिकरण में भूमि आवंटन और लीजबैक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और विभागीय जांच के निष्कर्षों को लेकर आधिकारिक आदेश तथा विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने पर ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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