कोलकाता में जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और एग्रीमेंट को लेकर विवाद; पटना डीएम ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित की
पटना। बिहार की राजधानी पटना के नौबतपुर स्थित एक मठ की करीब 22 बीघा जमीन को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। नौबतपुर के पैनापुर मौजा स्थित मठ की जमीन पर अलग-अलग पक्षों की दावेदारी, कोलकाता में रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी की भूमिका पर भी आरोप लगाए गए हैं। विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के डीजी कुंदन कृष्णन की ओर से कार्रवाई के लिए पत्र लिखे जाने के बाद पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है।
जांच टीम में उप विकास आयुक्त, दानापुर के अनुमंडल पदाधिकारी, पटना के जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी और अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन को शामिल किया गया है। टीम को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग पर स्थित है मठ की जमीन
नौबतपुर के पैनापुर मौजा में स्थित मठ की जमीन करीब 22 बीघा बताई जा रही है। यह जमीन बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग के किनारे है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले इस जमीन पर प्रतिबंधित माले के दस्ते ने कब्जा कर लाल झंडा लगा दिया था। इसके बाद जमीन विवादित हो गई और लंबे समय तक खाली पड़ी रही।
बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग बनने के बाद जमीन की कीमत और व्यावसायिक महत्व बढ़ने के साथ ही इस पर दावेदारी को लेकर गतिविधियां तेज हो गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मठ के मुख्य पुजारी ने अपने जीवनकाल में जमीन किसी को नहीं बेची थी।
मुख्य पुजारी की मृत्यु के बाद उनके दो शिष्यों रामशोवित दास और योगेन्दू दास के नाम सामने आए। आरोप है कि रामशोवित दास से जानीपुर थाना क्षेत्र के महंगुपुर निवासी प्रवीन कुमार उर्फ बऊआ जी ने जमीन की रजिस्ट्री कोलकाता में कराई। वहीं, दूसरे शिष्य योगेन्दू दास से बेऊर थाना क्षेत्र के टुनटुन गोप ने जमीन का निबंधन कराया।
इसके अलावा शहरामपुर निवासी कुंदन कुमार और अन्य लोगों की ओर से भी रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराए जाने की बात सामने आई है। वहीं, माले की ओर से भी जमीन पर दावा किए जाने की जानकारी दी गई है।
दाखिल-खारिज को लेकर तत्कालीन सीओ पर सवाल
जमीन पर दावा करने वाले टुनटुन गोप और प्रवीन कुमार उर्फ बऊआ जी ने अपने-अपने दस्तावेजों के आधार पर वैधानिक अधिकार जताया। दोनों पक्षों ने जमीन के दाखिल-खारिज के लिए नौबतपुर अंचलाधिकारी के यहां आवेदन दिया था।आरोप है कि तत्कालीन अंचलाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने टुनटुन गोप के पक्ष में दाखिल-खारिज कर राजस्व रसीद जारी कर दी। इसके बाद जमीन पर टुनटुन गोप की दावेदारी मजबूत हो गई।
मामले में सवाल उठाया गया है कि कोलकाता में पंजीकृत दस्तावेज के आधार पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया किस नियम के तहत पूरी की गई। आरोप लगाने वालों का कहना है कि बिहार के बाहर पंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज के लिए निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क का पालन जरूरी था।आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन किए बिना दाखिल-खारिज किया गया, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
चार पक्षों के बीच समझौते और एग्रीमेंट का दावा
पैनापुर स्थित मठ की जमीन को लेकर टुनटुन गोप, प्रवीन कुमार उर्फ बऊआ जी, कुंदन कुमार और प्रतिबंधित माले के आनंदी पासवान के बीच समझौता होने की बात सामने आई है।बताया गया है कि चारों पक्षों ने अपने-अपने हिस्से के अनुसार जमीन पर दावेदारी तय करने के बाद जीआरडीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के साथ एग्रीमेंट किया। एसटीएफ के डीजी कुंदन कृष्णन की ओर से कार्रवाई के लिए लिखे गए पत्र में जमीन के एग्रीमेंट और उसके बदले राशि प्राप्त किए जाने का उल्लेख होने की बात कही गई है।
वर्तमान सीओ की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में नौबतपुर के वर्तमान अंचलाधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि गलत प्रक्रिया से किए गए दाखिल-खारिज की समीक्षा कर उसे निरस्त करने की कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ ही संबंधित पक्षों को नोटिस देने और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।फिलहाल जिलाधिकारी की ओर से गठित चार सदस्यीय टीम मामले की जांच करेगी। जमीन के स्वामित्व, दस्तावेजों की वैधता, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया और एग्रीमेंट से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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