साबरमती से अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडी, डीजल की खपत में करीब 40 फीसदी तक कमी का लक्ष्य
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाने जा रहा है। देश की पहली एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) आधारित डीजल-एलएनजी दोहरे ईंधन वाली ट्रेन आज, 27 सितंबर को साबरमती से शुरू की जाएगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह साबरमती रेलवे स्टेशन से इसे हरी झंडी दिखाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य रेलवे में डीजल पर निर्भरता कम करना, ईंधन की लागत घटाना और प्रदूषणकारी उत्सर्जन में कमी लाना है। रेलवे के अनुसार, नई प्रणाली में एलएनजी डीजल की खपत के करीब 40 फीसदी हिस्से की जगह ले सकती है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है।
दो 1,400 हॉर्सपावर की पावर कार बदली गईं
इस परियोजना के तहत साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो की दो ड्राइविंग पावर कारों को एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन प्रणाली में परिवर्तित किया गया है। प्रत्येक पावर कार की क्षमता 1,400 हॉर्सपावर है। रेलवे के मुताबिक, दोनों परिवर्तित पावर कारों पर 2,000 किलोमीटर से अधिक का फील्ड ट्रायल भी किया जा चुका है, जिसमें तकनीक की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को परखा गया।
यह ट्रेन पूरी तरह एलएनजी पर निर्भर नहीं होगी। इंजन को जरूरत के अनुसार एलएनजी और डीजल दोनों पर चलाया जा सकता है। यदि किसी स्थान पर एलएनजी उपलब्ध नहीं है, तो ट्रेन डीजल पर चलती रहेगी। रेलवे के अनुसार, इससे ईंधन की उपलब्धता से जुड़ी समस्या के कारण परिचालन प्रभावित होने की संभावना कम होगी।
23.9 लाख रुपये सालाना बचत का अनुमान
रेलवे के परीक्षण आंकड़ों के आधार पर एक ड्राइविंग पावर कार से सालाना करीब 11.9 लाख रुपये की ईंधन बचत का अनुमान लगाया गया है। दो पावर कार वाली आठ कोच की रेक के स्तर पर यह अनुमानित बचत करीब 23.9 लाख रुपये सालाना बैठती है।
प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार में करीब 2,200 लीटर क्षमता का एलएनजी टैंक लगाया गया है। इसमें लगभग 950 से 1,000 किलोग्राम उपयोग योग्य एलएनजी रखी जा सकती है। स्वीकृत डिजाइन के अनुसार, पूरी तरह भरे टैंक से एक पावर कार करीब 444 किलोमीटर तक परिचालन कर सकती है।
इंजन की शक्ति और क्षमता बरकरार रखने की कोशिश
रेलवे के अनुसार, दोहरे ईंधन की यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजन की शक्ति, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता को बनाए रखते हुए ईंधन की खपत कम करने के लिए तैयार की गई है। यानी एलएनजी के इस्तेमाल के बावजूद ट्रेन के परिचालन प्रदर्शन में कमी न आए, इसका ध्यान रखा गया है।
1,542 करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाएं
अमित शाह साबरमती में इस दौरान 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न रेल परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण भी करेंगे। इनमें करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार डब्ल्यूएजी-12 लोकोमोटिव रखरखाव शेड भी शामिल है। यह शेड 300 हाई हॉर्सपावर वाले डब्ल्यूएजी-12 इलेक्ट्रिक इंजनों के रखरखाव के लिए तैयार किया गया है।
कार्यक्रम में अहमदाबाद-पलनपुर और अहमदाबाद-सामाखियाली रेल खंडों पर कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की आधारशिला तथा कुछ रेल खंडों पर स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग से जुड़े कार्य भी शामिल हैं। इसके अलावा साबरमती-सारखेज रेल लाइन के दोहरीकरण की परियोजना भी इसमें शामिल है।
रेलवे के लिए एलएनजी आधारित यह ट्रेन वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की दिशा में एक प्रयोग के तौर पर महत्वपूर्ण है। सफल संचालन की स्थिति में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल आगे अन्य ट्रेनों में भी बढ़ाया जा सकता है।
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