सपा जिला प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय कान्ह जी ने जताया गहरा शोक
संजीव सिंह बलिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी के निधन से समाजवादी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर है। सपा के जिला प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय कान्ह जी ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है।
सुशील कुमार पांडेय कान्ह जी ने कहा कि “रामगोविन्द चौधरी का जाना मेरे लिए केवल एक अपूरणीय क्षति नहीं, बल्कि मेरे जीवन की ऐसी व्यक्तिगत क्षति है, जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं होगी।”
उन्होंने कहा कि रामगोविन्द चौधरी का पूरा जीवन संघर्ष, समाजवादी विचारधारा और जनसेवा को समर्पित रहा। छात्र जीवन से ही उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया था। छात्र हितों के लिए संघर्ष करते हुए वे आंदोलनों में सक्रिय हुए और इसी संघर्ष ने आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की दिशा तय की।
9 जुलाई 1953 को जन्मे रामगोविन्द चौधरी ने प्रारंभिक शिक्षा गांव से प्राप्त करने के बाद सिकन्दरपुर और बलिया में उच्च शिक्षा हासिल की। छात्र राजनीति के दौरान वे टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री और बाद में अध्यक्ष निर्वाचित हुए। आपातकाल के दौर में उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया तथा लगभग 24 महीने तक जेल में रहना पड़ा।
लगातार कई बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया
जेल से रिहाई के बाद उनकी मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से हुई। यह मुलाकात आगे चलकर आत्मीय संबंध और राजनीतिक मार्गदर्शन का आधार बनी। वर्ष 1977 में उन्होंने तत्कालीन चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर अपने विधायी जीवन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने लगातार कई बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।रामगोविन्द चौधरी ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकारों में कैबिनेट मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण, उद्यान, बाल विकास एवं पुष्टाहार, बेसिक शिक्षा, समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे विभागों का दायित्व संभाला।
वर्ष 2017 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल भी बने
वर्ष 2017 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल भी बने। उनके राजनीतिक जीवन और विधानसभा में भूमिका का उल्लेख समकालीन रिपोर्टों में भी मिलता है।सुशील कुमार पांडेय कान्ह जी ने कहा कि रामगोविन्द चौधरी की पहचान केवल विधायक या मंत्री के रूप में नहीं थी, बल्कि वे समाज के कमजोर, वंचित और संघर्षरत वर्गों की आवाज थे। बेसिक शिक्षा मंत्री के रूप में शिक्षकों के खातों में सीधे ऑनलाइन वेतन भेजने, शिक्षामित्रों के समायोजन और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन जैसे फैसलों को उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण पहल माना जाता है।
जनपद ने एक अनुभवी, संघर्षशील और संवेदनशील नेता खो दिया
उन्होंने कहा कि पंचायती राज मंत्री के रूप में ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों को मानदेय देने की व्यवस्था भी उनके महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल रही। रामगोविन्द चौधरी ने राजनीति को कभी सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं माना, बल्कि इसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने और उसकी समस्याओं को सदन तथा सरकार तक पहुंचाने का साधन समझा।सपा प्रवक्ता ने कहा कि रामगोविन्द चौधरी का जीवन संघर्ष से निकले नेतृत्व, समाजवाद में आस्था और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनके निधन से समाजवादी आंदोलन और जनपद ने एक अनुभवी, संघर्षशील और संवेदनशील नेता खो दिया है।
राम गोविंद चौधरी का निधन, अखिलेश यादव ने जताया दुख
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और बलिया जिले के चिलकहर एवं बांसडीह सीट से सात बार के विधायक रहे राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार काे निधन हो गया है। उन्हाेंने 74 वर्ष की आयु में पीजीआई लखनऊ में अंतिम सांस ली।बलिया के सिकंदरपुर कस्बे के निकट गोसाईंपुर में जन्मे और टीडी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष रहे रामगोविंद चौधरी मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की सरकारों में कैबिनेट मंत्री भी रहे।
2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। जेपी आंदोलन की उपज रामगोविंद चौधरी खांटी समाजवादी नेता थे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भी करीबी रहे हैं।उनके निधन पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने अधिकारिक एक्स अकाउंट से रामगाेविंद की तस्वीर साझा करते हुए पाेस्ट में लिखा कि, राम गाेविंद चाैधरी का निधन, अत्यंत दुखद, ईश्वर उनकी आत्मा काे शांति प्रदान करें। शाेकाकुल परिवार काे यह असीम दुख सहने का संबल प्राप्त हाे।
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