लेह हिंसा के एक साल पूरे होने पर वांगचुक ने जान को खतरा होने की आशंका जताई, अमित शाह के इस्तीफे की मांग की
नई दिल्ली । जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अपनी जान का डर सता रहा है। सोनम वांगचुक ने सनसनीखेज दावा किया है। सोनम ने आशंका जताई है कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें ‘मुठभेड़’ में मारा जा सकता है।
लेह हिंसा के एक साल पूरे
सोनम वांगचुक ने लेह में पिछले साल हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर 24 सितंबर, 2025 को हुए प्रदर्शन के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा की उस घटना को एक साल पूरा होने के मौके पर एक सभा को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें अपनी जान के खतरे को लेकर चेतावनियां मिली हैं।
मुठभेड़ में मार दिए जाने का डर
वांगचुक ने कहा कि उन्होंने मुझे जेल में डाला। अब इस बात की भी आशंका है कि कहीं मुझे मुठभेड़ में मार दिया जाये। लोग मुझसे कहते हैं कि आपको मुठभेड़ में मार दिया जायेगा। अगर ऐसा होता है तो होने दें ताकि देश तो जाग जाये।
स्वतंत्र ‘‘जन न्यायाधिकरण’’ गठित करने की मांग
इस दौरान सोनम ने न्यायिक जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की और चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट जारी नहीं की गई तो पुलिस गोलीबारी की जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘‘जन न्यायाधिकरण’’ का गठन किया जायेगा। पिछले साल के आंदोलन के दौरान हुई मौतों के लिए गृह मंत्री को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए वांगचुक ने कहा कि इस घटना के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग
सोनम वांगचुक ने कहा, आज लद्दाख से मैं कहता हूं। अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए। लद्दाख में जो कुछ हुआ, उसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने स्थानीय युवाओं के खिलाफ एके-47 समेत स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर शाह के इस्तीफे की मांग का जिक्र करते हुए सोनम वांगचुक ने इस मांग का समर्थन किया, लेकिन लद्दाख की स्थिति पर गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया।
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