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13 करोड़ वोटरों का नाम हटाना गलत, ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन: सीजेपी

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मुख्य चुनाव आयुक्त को 48 घंटे का अल्टीमेटम; कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लगाया लोकतंत्र को खतरे का आरोप

नई दिल्ली। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के दावे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 48 घंटे की समयसीमा तय की है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में इस्तीफा नहीं हुआ तो पार्टी देशभर में आंदोलन शुरू करेगी।

दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह तय करने का अधिकार जनता के पास होना चाहिए कि वह अपने प्रतिनिधि और सरकार किसे चुने।

मतदाता सूची में बदलाव पर उठाए सवाल

दिपके ने चुनाव आयोग से जुड़ी हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का चुनावी प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का संदर्भ देते हुए कहा कि एनडीए और विपक्ष के बीच वोट प्रतिशत का अंतर करीब दो प्रतिशत था। ऐसे में उनका दावा है कि यदि करोड़ों नाम मतदाता सूची से बाहर होते हैं तो इसका चुनावी समीकरण पर असर पड़ने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विपक्षी नेताओं के क्षेत्रों का भी दिया उदाहरण

CJP संस्थापक ने दावा किया कि मतदाता सूची में बदलाव का असर विपक्षी नेताओं के चुनाव क्षेत्रों में भी देखने को मिला। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और दिल्ली के उदाहरण देते हुए कई आंकड़े सामने रखे।

दिपके के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के चुनाव क्षेत्र से करीब 50 हजार वोट हटाए गए और चुनाव परिणाम में हार का अंतर लगभग 15 हजार वोट रहा। इसी तरह उन्होंने दावा किया कि एमके स्टालिन के चुनाव क्षेत्र में करीब एक लाख नाम हटाए गए, जबकि जीत-हार का अंतर लगभग 45 हजार वोट का था।

दिल्ली के संदर्भ में उन्होंने अरविंद केजरीवाल के चुनाव क्षेत्र का उल्लेख करते हुए करीब 40 हजार वोट हटाए जाने का दावा किया। उनके अनुसार चुनाव में हार का अंतर लगभग 4-5 हजार वोट रहा।

इन दावों के आधार पर दिपके ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और उसके संभावित राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाए।

युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी की अपील

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने युवाओं और जेनरेशन-जी से लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत ने गणतंत्र बनने के साथ ही वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार देकर सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बनाया।

रांका ने स्वतंत्रता के बाद देश की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबी और अशिक्षा जैसी चुनौतियों के बावजूद संविधान निर्माताओं ने सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार देने का निर्णय लिया था।

सरकारी योजनाओं से मतदाता सूची को जोड़ने पर सवाल

रांका ने गोवा, पश्चिम बंगाल और बिहार में मतदाता सूची को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है और इसका असर राशन, पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाओं पर पड़ता है, तो मामला केवल मतदान के अधिकार तक सीमित नहीं रहेगा।

उन्होंने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की। उनका कहना था कि प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण किसी पात्र नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

48 घंटे बाद आंदोलन की चेतावनी

CJP ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देना चाहिए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि समयसीमा पूरी होने के बाद देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए मतदाता सूची से संबंधित आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।

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