3,567 नवनियुक्त शिक्षकों को बांटे नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री ने कहा- ज्वाइनिंग में बाधा डालने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से पैसे मांगने की शिकायत मिली, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और उसे जेल जाना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री मंगलवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी शिक्षक को विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी प्रबंधक को कोई समस्या या सवाल है, तो वह शासन के सामने अपनी बात रख सकता है, लेकिन शिक्षकों से धन की मांग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नियुक्ति सिर्फ नौकरी नहीं, बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम केवल सरकारी नौकरी देने तक सीमित नहीं है। नवनियुक्त शिक्षकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक यदि सालभर में 100 विद्यार्थियों से संवाद करता है, तो 3,567 शिक्षक मिलकर साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। शिक्षकों का प्रभाव केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे विद्यार्थियों के भविष्य और समाज की दिशा को भी प्रभावित करते हैं।
छह महीने में एक लाख और सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंगलवार को 3,567 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान प्रदेश में कुल 5,297 युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार लगातार नियुक्ति पत्र वितरित कर रही है और रोजगार देने का काम जारी रहेगा।
नकल माफिया पर रोक लगाने का दावा
मुख्यमंत्री ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार को जिम्मेदारी दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग का उद्देश्य नकल माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाना और योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले परीक्षा कोई देता था, जबकि नियुक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को मिल जाती थी। इस व्यवस्था का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने एक नवनियुक्त युवक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में उस युवक से आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। युवक के परिवार ने खेत बेचकर रकम जुटाने की तैयारी की, लेकिन उससे अधिक पैसे देने वाला दूसरा व्यक्ति आ गया और वह नियुक्ति से वंचित रह गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उसी युवक को योग्यता के आधार पर नियुक्ति मिली है। उन्होंने इसे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से जोड़ते हुए योग्य अभ्यर्थियों को अवसर देने की बात कही।
प्रयागराज में प्रदर्शन कर रहे युवाओं का भी जिक्र
मुख्यमंत्री योगी ने प्रयागराज में धरने पर बैठे युवाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंत्री से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को पत्र भेजने को कहा, ताकि इन युवाओं को एक बार राहत देने या निर्धारित समय के बाद प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने का विकल्प उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, जो युवाओं की प्रगति में बाधा बन रही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संबंधित नियमों और व्यवस्थाओं पर विचार करने का निर्देश दिया।
शिक्षक विद्यार्थियों में विकसित करें सही-गलत की समझ
नवनियुक्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और गूगल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीक जानकारी और उत्तर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन सही और गलत के बीच अंतर समझाने की भूमिका शिक्षक की होती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मन में कब, क्या और कहां जैसे सवालों की जिज्ञासा पैदा करनी है, यह शिक्षक तय करता है। यही जिज्ञासा आगे चलकर नवाचार और शोध का आधार बनती है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से विद्यालयों को केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्कूलों को विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति का केंद्र बनाया जाना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत अभियान के तहत बेसिक शिक्षा में सुविधाओं का संतृप्ति स्तर 36 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंचा है।
उन्होंने बताया कि माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2,300 से अधिक विद्यालयों में नए भवन और बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा 1,500 से अधिक राजकीय इंटर कॉलेजों की नई इमारतें तैयार हो चुकी हैं।
स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं, डिजिटल पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और अटल टिंकरिंग लैब विकसित किए जाने की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचा और प्रयोगशालाएं तैयार कर सकती है, लेकिन उनका उपयोग नवाचार और रोजगार के लिए कैसे किया जाएगा, यह विद्यार्थियों की क्षमता और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा।
2047 के भारत में आज के बच्चे निभाएंगे नेतृत्व की भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2047 में आज के 12 से 17 वर्ष के बच्चे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व कर रहे होंगे। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका और जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि उनका दायित्व केवल विद्यार्थियों को अच्छे अंक दिलाने तक सीमित नहीं है। उन्हें पाठ्यक्रम के साथ महापुरुषों की जीवनियां, देश-दुनिया की घटनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी भी विद्यार्थियों तक पहुंचानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने और अपने आचरण से सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक का व्यवहार और व्यक्तित्व विद्यार्थियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है।
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