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गांवों तक पहुंची साइबर सुरक्षा की पाठशाला, बख्शी का तालाब में लगी साइबर पंचायत

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साइबर विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को फर्जी कॉल, ओटीपी-यूपीआई ठगी, डिजिटल अरेस्ट समेत नए साइबर खतरों से बचाव के बताए तरीके

लखनऊ। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘साइबर पंचायत’ अभियान की पांचवीं कड़ी का आयोजन बख्शी का तालाब स्थित करियर ग्लोबल स्कूल में किया गया। साइ-नारी वेलफेयर फाउंडेशन और आरटी साइबर एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कार्यक्रम का संचालन देश के जाने-माने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और आरटी साइबर एकेडमी के संस्थापक रक्षित टंडन ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को बदलते साइबर अपराधों के तौर-तरीकों से परिचित कराया और बताया कि किस तरह साइबर अपराधी गांवों और कस्बों में रहने वाले लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपना निशाना बना रहे हैं।

रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाए साइबर अपराध

प्रशिक्षण के दौरान रक्षित टंडन ने फर्जी संदेश और संदिग्ध कड़ियों के जरिए होने वाली ठगी से लेकर फर्जी कॉल, ओटीपी और यूपीआई धोखाधड़ी, सामाजिक माध्यमों के खातों की हैकिंग, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिम और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों को सरल उदाहरणों के जरिए समझाया।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध का तरीका लगातार बदल रहा है। ऐसे में केवल तकनीकी जानकारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सतर्कता बरतना भी बेहद जरूरी है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते स्मार्टफोन और इंटरनेट के इस्तेमाल को देखते हुए लोगों को अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता है।

पासवर्ड और गोपनीय जानकारी को लेकर किया सतर्क

कार्यक्रम में विद्यार्थियों और अभिभावकों को मजबूत तथा अलग-अलग पासवर्ड रखने की सलाह दी गई। साथ ही दोहरी सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय रखने, अनजान कड़ियों पर क्लिक नहीं करने और संदिग्ध क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचने के बारे में बताया गया।

प्रतिभागियों को स्पष्ट रूप से समझाया गया कि किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, सीवीवी या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर अपराधी अक्सर बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, सरकारी कर्मचारी या किसी परिचित व्यक्ति के रूप में फोन कर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

सामाजिक माध्यमों पर निजी जानकारी साझा करने से बचने की सलाह

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों और अभिभावकों से कहा गया कि वे अपनी निजी जानकारी, फोटो और स्थान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करने में सावधानी बरतें।

रक्षित टंडन ने ऑनलाइन गेमिंग और साइबर बुलिंग से जुड़े खतरों के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत, संदिग्ध खेलों या आकर्षक प्रस्तावों के झांसे में आने से निजी जानकारी और धन दोनों को नुकसान हो सकता है।

साइबर ठगी होने पर तुरंत कार्रवाई जरूरी

कार्यक्रम में साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में घबराने या शिकायत करने में देरी नहीं करने की सलाह दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं।

उन्हें बताया गया कि ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने से संबंधित लेनदेन पर समय रहते कार्रवाई किए जाने और ठगी गई धनराशि को सुरक्षित किए जाने की संभावना बढ़ सकती है। इसके लिए साइबर अपराध शिकायत के आधिकारिक माध्यम का उपयोग करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।

सवाल-जवाब के जरिए दूर की शंकाएं

कार्यक्रम को केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रखा गया। विद्यार्थियों और अभिभावकों के साथ प्रश्नोत्तर और संवादात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने साइबर ठगी, मोबाइल सुरक्षा, सामाजिक माध्यमों और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका रक्षित टंडन ने सरल भाषा में समाधान बताया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्वयंसेवक दीपांशु, जान्हवी, अग्रिमा, शिरीन और आरोही ने सक्रिय सहयोग किया।

गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प

‘साइबर पंचायत’ की पांचवीं कड़ी ने यह संदेश दिया कि डिजिटल सुरक्षा अब केवल शहरों तक सीमित विषय नहीं है। गांवों और कस्बों में भी इंटरनेट तथा स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी हो गया है।

साइ-नारी वेलफेयर फाउंडेशन और आरटी साइबर एकेडमी ने आगे भी प्रदेश के अधिक से अधिक ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में इस अभियान को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। संस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को जागरूक कर उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए तैयार करना है, ताकि तकनीक का उपयोग सुविधा और विकास के लिए हो, साइबर अपराधियों के जाल में फंसने के लिए नहीं।

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