तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप को “हत्यारा अपराधी” बताते हुए कहा कि उन्हें केवल ताकत की भाषा ही समझ आती है।
नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता (एमओयू) अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर एक और बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर सकता है। ट्रंप ने कहा, “हमने कल रात उन्हें जोरदार तरीके से निशाना बनाया और जरूरत पड़ी तो आज रात भी हमला कर सकते हैं।”
ट्रंप के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए गरीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि यह बयान अमेरिका की ताकत नहीं, बल्कि उसकी वर्षों पुरानी दबाव, प्रतिबंध और धमकियों की नीति की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा, “अपराधी और हत्यारे ट्रंप से उसी भाषा में बात की जानी चाहिए, जिसे वह समझते हैं और वह भाषा है ताकत की।”
वहीं, ट्रंप की ओर से ईरान के अहम तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हमला करने की चेतावनी के बाद ईरान के पूर्व विदेश मंत्री अली अकबर वेलायती ने कहा कि ईरान पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र से अपने दुश्मनों का सफाया करने के लिए कार्रवाई करेगा।जबकि ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। हम वादा करते हैं कि एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा वापस नहीं जाएगा।”
एमओयू खत्म करने की घोषणा पर भी जताई नाराजगी
दूसरी ओर, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ट्रंप द्वारा दोनों देशों के बीच हुए समझौते को समाप्त घोषित किए जाने को “घृणित” करार दिया। उनका कहना था कि ऐसे बयान उस समय आए हैं, जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास पहले ही क्षेत्रीय तनाव के कारण कमजोर पड़ चुके हैं।ट्रंप ने नाटो सम्मेलन में ईरानी नेतृत्व पर भी तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “बुरे और बीमार लोग” बताया था। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है और अब समझौते का कोई अर्थ नहीं रह गया है।
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