7 दिवसीय ‘ऑपरेशन साइ-वज्र’ का ऐलान, 530 करोड़ रुपये की साइबर ठगी रोकी गई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। डीजीपी ने प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर 7 दिवसीय विशेष अभियान “ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)” चलाने के निर्देश दिए। अभियान का उद्देश्य साइबर अपराधियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक और पीड़ितों को जल्द राहत दिलाना है।
बैठक में पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम बी.के. सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक पवन कुमार, सभी कमिश्नरेट और जनपदों के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर सेल, साइबर थानों के प्रभारी तथा साइबर मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।
साइबर अपराध नियंत्रण बना डीजीपी की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल
बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप साइबर अपराध नियंत्रण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कार्यभार संभालने के बाद निर्धारित 10 प्रमुख प्राथमिकताओं में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण को प्रमुख स्थान दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर पुलिसिंग, तकनीकी क्षमता, साइबर इंटेलिजेंस और पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था को मजबूत करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाई है।
15 महीनों में बड़ी कार्रवाई
बैठक के दौरान 1 अप्रैल 2025 से 30 जून 2026 तक की उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इस अवधि में प्रदेश पुलिस ने 2,94,024 संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए। 1,81,405 मोबाइल उपकरण (IMEI) ब्लॉक किए। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में 530 करोड़ रुपये की धनराशि पर Lien/Hold लगाकर उसे साइबर अपराधियों तक पहुंचने से रोका।डीजीपी ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों को और अधिक तेज, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जाए।
शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर
डीजीपी ने निर्देश दिए कि साइबर अपराध पीड़ितों की शिकायतों का पंजीकरण पूरी पारदर्शिता और तेजी से किया जाए। तकनीकी कारणों से लंबित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि ठगी की गई धनराशि अपराधियों के खातों तक पहुंचने से पहले सुरक्षित की जा सके। उन्होंने सभी जिलों और कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश भी दिए।
संदिग्ध मोबाइल, बैंक खातों और तकनीक पर रहेगा फोकस
बैठक में निर्देश दिए गए कि साइबर अपराध में प्रयुक्त संदिग्ध मोबाइल नंबर, मोबाइल उपकरण, बैंक खाते और अन्य तकनीकी संसाधनों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाए। साइबर इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई को और मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया।
पीड़ितों को पैसा लौटाने के लिए MRM व्यवस्था
बैठक में भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित Money Restoration Module (MRM) की विस्तार से जानकारी दी गई। इस मॉड्यूल के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ित अपनी होल्ड की गई धनराशि वापस पाने के लिए ऑनलाइन अनुरोध कर सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद बैंक नियमानुसार धनराशि वापस करता है। 50 हजार रुपये तक की राशि की बहाली के लिए एफआईआर या कोर्ट आदेश आवश्यक नहीं है, जबकि इससे अधिक राशि के मामलों में एफआईआर अनिवार्य होगी।
निर्दोष लोगों के बैंक खाते खोलने के लिए GRM
बैठक में Grievance Redressal Module (GRM) की भी समीक्षा की गई। यदि जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति का बैंक खाता होल्ड या फ्रीज हो जाता है तो वह बैंक के माध्यम से GRM पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। जांच के बाद उचित पाए जाने पर खाते से प्रतिबंध हटाने की कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी ने MRM और GRM दोनों व्यवस्थाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।
महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों पर विशेष फोकस
डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय साइबर अपराधों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए। ऐसे मामलों में साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर संगठित गिरोहों के खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशिक्षण और जनजागरूकता अभियान होंगे तेज
बैठक में साइबर पुलिसकर्मियों के नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता बढ़ाने, नई साइबर अपराध प्रवृत्तियों के अनुरूप क्षमता विकास और आम नागरिकों के लिए व्यापक साइबर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।
7 दिन चलेगा ‘ऑपरेशन साइ-वज्र’
बैठक के अंत में डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रदेशभर में 7 दिवसीय विशेष अभियान ‘ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)’ चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान साइबर अपराधियों के खिलाफ समन्वित, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख कार्रवाई की जाएगी, जिससे साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो और नागरिकों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत हो सके।
यह भी पढ़े : लखनऊ में सुनार को गोली मारकर हुई 1.5 करोड़ की लूट का खुलासा, दो शातिर बदमाश गिरफ्तार
