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शहरों में ट्रैफिक जाम खत्म करने के लिए नई रणनीति, डीजीपी ने जारी किए सख्त निर्देश

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने शहरों में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए नई कार्ययोजना लागू की है। इसके तहत विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।नई व्यवस्था के तहत ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय थानों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाम की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

क्या होंगे बड़े बदलाव?

एसओपी के अनुसार, व्यस्त चौराहों और तिराहों के आसपास 100 मीटर के दायरे को पूरी तरह खाली रखा जाएगा। इस क्षेत्र में न तो वाहन खड़े किए जा सकेंगे और न ही सवारियों को बैठाया या उतारा जा सकेगा।
इसके अलावा, पीक ऑवर्स में अधिक भीड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी, ताकि यातायात सुचारु रूप से चलता रहे।

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना

यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं—
नो एंट्री का उल्लंघन: ₹20,000 जुर्माना
नो पार्किंग/अवैध पार्किंग: पहली बार ₹500, बाद में ₹2000
गलत दिशा में वाहन चलाना: ₹2000 जुर्माना

ई-रिक्शा और अतिक्रमण पर भी सख्ती

मुख्य मार्गों को जाम से मुक्त रखने के लिए कुछ सड़कों को ई-रिक्शा मुक्त क्षेत्र घोषित करने की योजना है। साथ ही, सड़कों पर अतिक्रमण हटाने और जरूरत के अनुसार मार्गों को चौड़ा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

स्कूल-ऑफिस टाइमिंग में बदलाव की सिफारिश

जाम कम करने के लिए स्कूलों और दफ्तरों के खुलने और बंद होने के समय में 15-15 मिनट का अंतर रखने की सलाह दी गई है, ताकि एक साथ ट्रैफिक का दबाव न बढ़े।

सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली स्थिति

नई योजना के तहत किए गए सर्वे में लखनऊ के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक जाम की गंभीर तस्वीर सामने आई है।
बख्शी का तालाब से पॉलिटेक्निक मार्ग (16.26 किमी) पर पीक टाइम में यात्रा का समय सामान्य से 15 गुना तक बढ़ जाता है।
आलमबाग के अवध चौराहा से दुबग्गा मार्ग (10.51 किमी) पर भी पीक आवर्स में यात्रा का समय 10 गुना तक बढ़ जाता है।

इस बदलाव से राहत मिलने की उम्मीद

पुलिस मुख्यालय की यह नई पहल शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि इन नियमों का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है और आम जनता को जाम से कितनी राहत मिलती है।

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