मेरठ । यूपी में मेरठ के दौराला की उस शाम को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गई थीं…घर के आंगन में भाई की लाश रखी थी… और एक बहन बार-बार उसे झकझोर कर कह रही थी—“भैया उठो ना… देखो मैं आ गई… मुझे छोड़कर मत जाओ…”उसकी सिसकियां, उसका दर्द, उसका विलाप—सब कुछ इतना सच्चा लग रहा था कि वहां मौजूद हर शख्स का दिल पसीज गया। कोई उसे ढांढस बंधा रहा था, कोई खुद आंसू पोंछ रहा था।लेकिन किसी को क्या पता था… कि ये आंसू नहीं, एक खौफनाक साजिश का पर्दा था।
प्यार, लालच और विश्वासघात की कहानी
अंकित… एक साधारण युवक, जो अपनी बहन को अपनी दुनिया मानता था।वहीं बहन अलका… जो दुनिया के सामने खुद को भाई का सहारा बताती रही, लेकिन अंदर ही अंदर उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी थी।गांव में चर्चा थी कि अलका ने भाई की जिम्मेदारी के चलते शादी नहीं की…लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट थी।अलका का गांव के ही पवन उर्फ पोली से प्रेम संबंध था। दोनों एक-दूसरे के साथ जिंदगी बिताना चाहते थे, लेकिन उनके रास्ते में सबसे बड़ी दीवार था—अंकित।वह इस रिश्ते का विरोध करता था… और यही विरोध उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गया।
मौत की साजिश… अपने ही घर में
प्यार और लालच ने मिलकर एक खतरनाक फैसला लिया—“अंकित को रास्ते से हटाना होगा…”योजना बेहद शातिर थी।अंकित शराब पीता था… इसलिए शराब को ही हथियार बनाया गया।घर में रखी शराब में जहर मिला दिया गया… ताकि मौत हादसा लगे, हत्या नहीं।लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था…
एक नहीं, तीन जिंदगियां खत्म
अंजाने में अंकित वही जहरीली शराब लेकर अपने दोस्त के पास पहुंच गया।वहां उसके साथ दो और लोगों ने भी वही शराब पी ली…कुछ ही पलों में तीनों तड़पने लगे… और देखते ही देखते तीन जिंदगियां खत्म हो गईं।एक साजिश, जो एक मौत के लिए रची गई थी… उसने तीन घरों को उजाड़ दिया।
आंसुओं का नाटक… और सच का खुलासा
घटना के बाद अलका का दर्द देखने लायक था…वह बार-बार बेहोश हो रही थी, खुद को कोस रही थी, लोगों से कह रही थी—“मैंने उसे समझाया था… शराब मत पिया करो…”हर कोई उसकी बातों पर भरोसा कर रहा था…लेकिन पुलिस को उसके आंसुओं में सच्चाई नहीं, शक नजर आया।बार-बार बदलते बयान… उलझी हुई कहानियां…और फिर सख्ती से हुई पूछताछ…आखिरकार सच सामने आ ही गया।
पुलिस के सामने टूटा झूठ,एक सवाल… जो रह गया
पुलिस की जांच में अलका और उसके प्रेमी पवन का चेहरा बेनकाब हो गया।दोनों ने कबूल किया कि उन्होंने मिलकर यह साजिश रची थी।जो बहन कल तक भाई की लाश पर रो रही थी…वही उसकी मौत की वजह निकली।यह सिर्फ एक हत्या नहीं…यह रिश्तों के टूटने, भरोसे के मरने और लालच की हद पार करने की कहानी है।जहां एक भाई अपनी बहन के लिए जी रहा था… वहीं बहन ने उसके लिए मौत लिख दी।
और पीछे रह गया एक सवाल
क्या प्यार और लालच इतना अंधा हो सकता है… कि अपने ही खून से रिश्ता खत्म कर दे?
