एसएमयूपीन्यूज,डेस्क। दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच तनाव एक बार फिर उफान पर है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी अब खुले टकराव की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए सख्त अल्टीमेटम को ईरान ने पूरी तरह नकारते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।ईरानी सेना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अली अब्दोल्लाही ने अमेरिकी चेतावनी को ‘घबराहट में दिया गया गैर-जिम्मेदाराना बयान’ बताया। उन्होंने साफ कहा कि दबाव या धमकी से ईरान झुकने वाला नहीं है और हर स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की चेतावनी दी थी
दरअसल, ट्रंप ने 48 घंटे के भीतर ईरान से समझौता करने या रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की चेतावनी दी थी। उन्होंने संकेत दिया था कि समय सीमा पूरी होने पर अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बना सकता है। यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले तक बातचीत के संकेत मिल रहे थे।इसी बीच हालात को और विस्फोटक बनाने वाली खबर सामने आई है। ईरान ने आरोप लगाया है कि इज़राइल और अमेरिका ने उसके परमाणु ढांचे के आसपास हमला किया है। इस मुद्दे पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि ऐसे हमले पूरे क्षेत्र को रेडियोधर्मी खतरे में डाल सकते हैं।
आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी गहरी चिंता जताई
बताया जा रहा है कि हमला बुशेहर परमाणु संयंत्र के नजदीक हुआ। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने फिलहाल रेडिएशन स्तर सामान्य होने की बात कही है, लेकिन स्थिति को बेहद संवेदनशील बताया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हमले में एक सुरक्षाकर्मी की मौत हुई है और कुछ ढांचों को नुकसान पहुंचा है, जबकि मुख्य संयंत्र सुरक्षित है।इस घटनाक्रम पर आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि परमाणु स्थलों के आसपास किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई बड़े हादसे को जन्म दे सकती है और इसका असर सीमाओं से परे पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।कुल मिलाकर, हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस संकट पर टिकी हुई हैं। अगर समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह तनाव बड़े संघर्ष में बदल सकता है।
