लखनऊ । उत्तर प्रदेश के बिजली उत्पादन क्षेत्र से एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने लगभग 81% डीम्ड प्लांट लोड फैक्टर (PLF) हासिल कर पिछले 7 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस उपलब्धि को सरकारी क्षेत्र की दक्षता और तकनीकी क्षमता का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।
इंजीनियरों, कर्मचारियों और संविदा कर्मियों को बधाई
इस उपलब्धि पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उत्पादन निगम के इंजीनियरों, कर्मचारियों और संविदा कर्मियों को बधाई देते हुए इसे कठिन परिस्थितियों में हासिल बड़ी सफलता बताया है।संघर्ष समिति ने इस प्रदर्शन के आधार पर एक बड़ी मांग भी उठाई है। समिति का कहना है कि 3 वर्ष पहले एनटीपीसी के साथ ज्वाइंट वेंचर में दी गई 2×800 मेगावाट अनपरा E और 2×800 मेगावाट ओबरा D परियोजनाएं अब वापस उत्पादन निगम को सौंप दी जानी चाहिए, ताकि इन्हें तेजी से पूरा कर प्रदेश को सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
परियोजनाओं का प्रदर्शन
वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्पादन निगम की विभिन्न तापीय परियोजनाओं ने शानदार प्रदर्शन किया—
अनपरा A – 80.39%
अनपरा B – 87.45%
अनपरा D – 88.93%
ओबरा B – 60.53%
ओबरा C – 65.27%
हरदुआगंज – 92.17%
पारीछा – 88.31%
जवाहरपुर – 82.60%
पनकी – 78.43%
कुल मिलाकर लगभग 81% डीम्ड PLF हासिल हुआ
इन सभी के संयुक्त प्रदर्शन से कुल मिलाकर लगभग 81% डीम्ड PLF हासिल हुआ है।संघर्ष समिति ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और गैस आधारित बिजली उत्पादन में अनिश्चितता के बीच यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम संकेत है।समिति के अनुसार, आगामी गर्मियों में उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग 36,000 मेगावाट तक पहुंच सकती है। ऐसे में उत्पादन निगम के सभी बिजलीघर पूरी क्षमता के साथ उत्पादन करने को तैयार हैं, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सके।
ज्वाइंट वेंचर फैसले पर पुनर्विचार किया जाए
अंत में संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि ओबरा D और अनपरा E परियोजनाओं के ज्वाइंट वेंचर फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और इन्हें पुनः उत्पादन निगम को सौंपा जाए। समिति का तर्क है कि सरकारी क्षेत्र की सिद्ध क्षमता को नजरअंदाज कर निजी या ज्वाइंट वेंचर मॉडल थोपना न तो आर्थिक रूप से उचित है और न ही जनहित में।
