गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया अशांति और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में जैन धर्म का अहिंसा का संदेश पूरी मानवता के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक हो गया है। महावीर जयंती के अवसर पर Gandhinagar स्थित कोबा तीर्थ में सम्राट संप्रति संग्रहालय के उद्घाटन के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह बात कही।प्रधानमंत्री ने भगवान महावीर को नमन करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात चिंताजनक हैं, जहां कई क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे समय में जैन दर्शन के मूल सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह—दुनिया को शांति और संतुलन की दिशा दिखा सकते हैं।
अब सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही
उन्होंने सम्राट संप्रति के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने शासन को सेवा का माध्यम बनाकर अहिंसा के प्रसार का कार्य किया, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संग्रहालय न केवल भारत की प्राचीन विरासत को संरक्षित करता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि देश में कभी तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय थे, लेकिन विदेशी आक्रमणों के कारण अमूल्य पांडुलिपियां नष्ट हो गईं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी इन धरोहरों के संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन अब सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है।
डिजिटल संग्रह तैयार करने जैसे कदम शामिल
उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत प्राचीन पांडुलिपियों को खोजने, संरक्षित करने और डिजिटलीकरण का कार्य आधुनिक तकनीकों की मदद से किया जा रहा है। इसमें उच्च गुणवत्ता स्कैनिंग, रासायनिक संरक्षण और डिजिटल संग्रह तैयार करने जैसे कदम शामिल हैं, ताकि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जा सके। उल्लेखनीय है कि सम्राट संप्रति संग्रहालय जैन धर्म की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को समेटे हुए है। सात दीर्घाओं में विभाजित इस संग्रहालय में दुर्लभ अवशेष, प्राचीन पांडुलिपियां और जैन कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो देश-विदेश के शोधकर्ताओं और आगंतुकों को भारतीय सभ्यता की गहराई से परिचित कराएंगी।
