कानपुर। शहर में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में तीन निजी अस्पतालों की भूमिका सामने आई है, जिनमें से एक अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहा था।

गरीबों की मजबूरी, दलालों का धंधा

जांच में सामने आया है कि यह पूरा रैकेट आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाकर चलाया जा रहा था। उन्हें पैसों का लालच देकर किडनी डोनेट करने के लिए तैयार किया जाता था। एक सनसनीखेज मामले में उत्तराखंड के एक युवक से करीब 10 लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा किया गया, लेकिन उसे सिर्फ 9.5 लाख रुपये ही दिए गए। वहीं, उसी किडनी को जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से ज्यादा में बेच दिया गया।

बिना सुविधा के अस्पतालों में हो रहे थे ट्रांसप्लांट

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन अस्पतालों में यह ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे, वहां छोटे ऑपरेशन की भी पर्याप्त सुविधा नहीं थी। इसके बावजूद बड़े स्तर पर किडनी ट्रांसप्लांट जैसे जटिल ऑपरेशन किए जा रहे थे। इसके लिए लखनऊ, दिल्ली और मुंबई से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया जाता था, जिनमें नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजिस्ट और एनेस्थेटिस्ट शामिल होते थे।

छापेमारी में खुलासे पर खुलासा

सोमवार को पुलिस की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम—एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी और सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश सिंह के नेतृत्व में—कल्याणपुर क्षेत्र के कई अस्पतालों में छापेमारी की गई। प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल में जांच के दौरान कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं।

बंद अस्पताल में मिला किडनी डोनर

पुलिस को एक बड़ा सुराग तब मिला जब आवास विकास स्थित एक बंद पड़े अस्पताल में किडनी डोनर भर्ती मिला। यह अस्पताल करीब दो महीने पहले ही बंद हो चुका था, लेकिन अंदर इलाज जारी था। मौके से मरीज के भर्ती होने के दस्तावेज भी बरामद हुए।

10 से ज्यादा लोग हिरासत में, बड़े नामों पर शक

इस मामले में दलाल, अस्पताल संचालक, डॉक्टर दंपती समेत करीब 10 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पांडुनगर निवासी डॉ. इंदरजीत सिंह, उनके परिजन और अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इस रैकेट में कुछ बड़े डॉक्टर और संस्थानों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं।

छापे के डर से बुझ गई अस्पतालों की लाइटें

जैसे ही किडनी रैकेट का खुलासा हुआ, कल्याणपुर क्षेत्र के कई अस्पतालों में हड़कंप मच गया। पुलिस की दबिश के डर से कई अस्पतालों ने अपनी लाइटें बंद कर दीं, ताकि बाहर से लगे कि अस्पताल बंद हैं। यहां तक कि तीमारदारों को भी बाहर निकलने से रोका गया।

50 से ज्यादा अस्पताल जांच के दायरे में

स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए 50 से अधिक अस्पतालों को रडार पर लिया है। देर रात तक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें संयुक्त रूप से जांच में जुटी रहीं। अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा काला सच

गौरतलब है कि करीब 22 साल पहले भी कानपुर में किडनी की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया था, जिसकी जांच सीबीसीआईडी ने की थी। उस मामले में भी एक नामी नर्सिंग होम और सर्जन का नाम सामने आया था। अब एक बार फिर ऐसे रैकेट का खुलासा होना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।कानपुर का यह किडनी रैकेट सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी खामी और मानवता के खिलाफ संगठित अपराध का उदाहरण है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर कितने बड़े चेहरों को बेनकाब कर पाती हैं।

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