लखनऊ । राजधानी में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि पहले बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाया गया और अब 1 अप्रैल से अभियंताओं व जूनियर इंजीनियरों के निलंबन की तैयारी की जा रही है।

25 हजार संविदा कर्मियों को हटाए जाने की आशंका

संघर्ष समिति के अनुसार, प्रदेशभर में करीब 25 हजार संविदा कर्मियों को हटाए जाने की आशंका है। राजधानी लखनऊ के लेसा क्षेत्र में ही इस महीने 340 कर्मियों को सेवा से बाहर किया जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या ऑपरेटिंग स्टाफ की है। समिति का कहना है कि इससे बिजली व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।समिति ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल द्वारा हाल ही में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निलंबन के लिए अधीक्षण अभियंताओं, अधिशासी अभियंताओं, सहायक अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों की सूची तैयार की जाए। संघर्ष समिति ने इस आदेश को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विभाग में भय और अस्थिरता का माहौल बन रहा है।

निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे

संघर्ष समिति का कहना है कि प्रबंधन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर रहा है और इससे निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संविदा कर्मियों की बहाली नहीं की गई और उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो बिजली कर्मी व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। समिति ने यह भी कहा कि नवरात्र और रामनवमी जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान कर्मियों को हटाना संवेदनहीन कदम है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्यवाहियों से आने वाली गर्मी में बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

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