लखनऊ । करीब तीन दशक पुराने चुनावी विवाद मामले में लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कांग्रेस नेता राज बब्बर को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।विशेष न्यायाधीश हरबंस नारायण की अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें राज बब्बर को दो साल की सजा और 6500 रुपये जुर्माना लगाया गया था। अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए उन्हें पूरी तरह दोषमुक्त करार दिया।
कृष्ण सिंह राणा ने थाना वजीरगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई थी
यह मामला 2 मई 1996 का है, जब मतदान अधिकारी कृष्ण सिंह राणा ने थाना वजीरगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि मतदान के दौरान राज बब्बर अपने समर्थकों के साथ मतदान केंद्र पहुंचे और फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए वहां मौजूद अधिकारियों से मारपीट की।
इस घटना में मतदान कर्मियों को चोटें आईं थी
शिकायत में यह भी कहा गया कि इस घटना में मतदान कर्मियों को चोटें आईं, जिसके बाद पुलिस ने जांच कर चार्जशीट दाखिल की थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद 2022 में निचली अदालत ने राज बब्बर को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।
एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब उन्हें राहत दे दी
हालांकि, इस फैसले के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब उन्हें राहत दे दी है।मामले में सह-आरोपी अरविंद यादव की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी।इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और इसे एक अहम कानूनी मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
