लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। समिति का कहना है कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की हालिया रेटिंग में दोनों निगमों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है, ऐसे में निजीकरण का निर्णय पूरी तरह अनुचित है।संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की रेटिंग ‘C-’ से सुधरकर ‘B-’ हो गई है और इसका स्कोर भी काफी बढ़ा है। वहीं, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है।
दोनों निगमों में वितरण हानियां घटकर राष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंची
दोनों निगमों में वितरण हानियां घटकर राष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंच गई हैं और कलेक्शन एफिशिएंसी भी बेहतर हुई है। समिति ने बताया कि ये दोनों निगम प्रदेश के 42 पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर जनपदों में बिजली आपूर्ति का जिम्मा संभालते हैं, जहां भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियां अधिक हैं। ऐसे क्षेत्रों की तुलना बड़े शहरी और औद्योगिक इलाकों से करना उचित नहीं है।संघर्ष समिति ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया कि निजीकरण के समर्थन में अब तक गलत और बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश किए गए। इससे ऊर्जा क्षेत्र में असंतोष बढ़ा है और औद्योगिक शांति प्रभावित हुई है।
निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि वे पिछले 482 दिनों से आंदोलनरत हैं, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति देना उनकी प्राथमिकता रही है। प्रयागराज में महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन के दौरान भी बिजली कर्मियों ने उत्कृष्ट कार्य कर अपनी जिम्मेदारी निभाई।समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि जब तक निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।प्रदेशभर में बिजली कर्मियों द्वारा लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अब और अधिक गरमाता जा रहा है।
