लखनऊ। प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण को नई दिशा देने के लिए चलाया जा रहा मिशन शक्ति अभियान अब अपने फेज-5 के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। इस बार सरकार ने इसे पारंपरिक सुरक्षा कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर नवाचार और सहभागिता आधारित मॉडल में बदल दिया है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस किया गया है।इस चरण की सबसे महत्वपूर्ण पहल ‘ड्राइविंग माय ड्रीम्स’ है, जिसके तहत हर जिले में कम से कम 100 महिलाओं और युवतियों को ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसरों से जोड़ना है, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।
एक दिन की जिलाधिकारी’ कार्यक्रम को भी शामिल किया गया
इसके साथ ही ‘एक दिन की जिलाधिकारी’ कार्यक्रम को भी शामिल किया गया है, जिसमें मेधावी बालिकाओं को एक दिन के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी का अनुभव कराया जाएगा। इस पहल से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें शासन व्यवस्था की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा।इस बार अभियान में एक और अहम पहल ‘हक की बात जिलाधिकारी के साथ’ जोड़ी गई है, जिसके तहत महिलाएं सीधे जिलाधिकारी के सामने अपनी समस्याएं और शिकायतें रख सकेंगी। इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ डिजिटल एमओयू किए जा रहे
शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ डिजिटल एमओयू किए जा रहे हैं, ताकि छात्राओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और करियर अवसरों से जोड़ा जा सके।डिजिटल सशक्तीकरण पर जोर देते हुए प्रदेश के आठ बड़े शहरों में महिला सुरक्षा और जागरूकता पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से किया जाएगा। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े स्तर पर अभियान चलाकर युवाओं और शहरी वर्ग को जोड़ा जाएगा।नगर विकास विभाग के तहत ‘अमृत मित्र’ योजना के माध्यम से महिलाओं को शहरी सेवाओं और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भागीदारी दी जाएगी। वहीं स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल मार्केटिंग और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
मुख्य आकर्षण
- हर जिले में 100 महिलाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण
- मेधावी बालिकाएं बनेंगी एक दिन की जिलाधिकारी
- ‘हक की बात जिलाधिकारी के साथ’ संवाद कार्यक्रम
- विश्वविद्यालयों के साथ डिजिटल एमओयू
- सोशल मीडिया और डिजिटल स्क्रीन पर जागरूकता अभियान
- ‘अमृत मित्र’ योजना में महिलाओं की भागीदारी
- स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना
- रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस
