बदायूं। जिले के मूसाझाग थाना क्षेत्र के सैजनी गांव स्थित एचपीसीएल के सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट में दो अधिकारियों की गोली मारकर हत्या के सनसनीखेज मामले के बाद अब इस पूरे प्रकरण के पीछे चल रहे बड़े आर्थिक खेल की परतें खुलने लगी हैं। शुरुआती जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पराली से बनने वाली बायोफर्टिलाइजर खाद के कारोबार में अवैध कमाई और दबंगई का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। आशंका जताई जा रही है कि इसी अवैध कमाई और संसाधनों पर कब्जे की लड़ाई में दो अधिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
खाद के कारोबार पर कब्जे की जंग
सूत्रों के मुताबिक प्लांट से निकलने वाली बायोफर्टिलाइजर खाद की सप्लाई, लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन के काम में भारी आर्थिक लाभ होता है। इसी वजह से लंबे समय से स्थानीय दबंगों, बिचौलियों और कुछ रसूखदार लोगों की नजर इस कारोबार पर थी। आरोप है कि प्लांट के भीतर ही कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से खाद की सप्लाई में नियमों को ताक पर रखकर मनमानी की जा रही थी।बताया जा रहा है कि जहां आम किसान और छोटे व्यापारी खाद लेने के लिए लंबी कतार में खड़े रहते थे, वहीं रसूखदार लोग अपने प्रभाव के दम पर सीधे प्लांट परिसर से ट्रॉलियां भरवाकर खाद बाहर ले जाते थे।
एक ट्रॉली का भुगतान, दस ट्रॉली तक माल बाहर
सूत्रों का दावा है कि आरोपी अजय प्रताप सिंह एक ट्रॉली का भुगतान करता था, लेकिन दबंगई के बल पर आठ से दस ट्रॉलियां तक खाद निकलवा लेता था। इस दौरान कतार में खड़े किसानों और व्यापारियों को धमकाकर पीछे कर दिया जाता था। माना जा रहा है कि प्लांट के कुछ कर्मचारी भी इस पूरे खेल में शामिल थे, जिसकी वजह से अंदरूनी मिलीभगत से खाद की लोडिंग में खुलकर मनमानी हो रही थी।
सस्ती खाद से बढ़ी मांग, बढ़ा अवैध कारोबार
शुरुआत में प्लांट से बनने वाली बायोफर्टिलाइजर खाद करीब 50 पैसे प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई जा रही थी, जिससे आसपास के किसानों को काफी फायदा मिल रहा था। लेकिन जैसे-जैसे इसकी मांग बढ़ी, वैसे-वैसे इस कारोबार में बिचौलियों और दबंगों की दिलचस्पी भी बढ़ती गई।कंपनी प्रबंधन ने हालात को देखते हुए खाद की बिक्री को नई ब्रांडिंग और थर्ड पार्टी व्यवस्था के जरिए करने की तैयारी शुरू कर दी थी, जिससे इसकी कीमत दो से ढाई रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती थी। माना जा रहा है कि इस बदलाव से अवैध तरीके से खाद निकालकर मुनाफा कमाने वालों के हित प्रभावित होने वाले थे, जिससे तनाव और बढ़ गया।
लोडिंग और ओवरटाइम में भी वसूली
सूत्र बताते हैं कि प्लांट परिसर में केवल खाद की सप्लाई ही नहीं, बल्कि लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन के नाम पर भी मोटी कमाई होती थी। यहां तक कि ड्यूटी करने वाले कुछ कर्मचारियों से ओवरटाइम के नाम पर भी दबंगों द्वारा पैसे वसूले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।जब प्लांट की शुरुआत हुई थी, तब यहां करीब 125 आउटसोर्सिंग कर्मचारी काम करते थे। लेकिन विवाद और दबाव बढ़ने के चलते कर्मचारियों की संख्या घटकर अब 100 से भी कम रह गई है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। 12 मार्च से ही आरोपी का घर और राशन की दुकान बंद है। प्रशासन ने उसकी छह दुकानों को खाली कराकर उन्हें ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित कर दिया है। साथ ही पुलिस आरोपी के खिलाफ एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाने की तैयारी भी कर रही है।पुलिस आरोपी से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर रही है। यदि जांच में किसी की संलिप्तता या नजदीकी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
डीएम-एसएसपी ने किया प्लांट का निरीक्षण
घटना के बाद जिलाधिकारी अवनीश राय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने सैजनी गांव स्थित प्लांट का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों ने प्लांट के कर्मचारियों से बातचीत कर उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया।डीएम ने बताया कि प्लांट की सुरक्षा के लिए परिसर में पीएसी तैनात कर दी गई है। वहीं घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और शनिवार को भी प्लांट का संचालन पूरी तरह ठप रहा।
प्लांट में बनेगी नई पुलिस चौकी
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अंकिता शर्मा ने प्लांट परिसर में नई पुलिस चौकी स्थापित करने के आदेश दिए हैं। इस चौकी पर सुरक्षा के लिए दो उपनिरीक्षक और आठ आरक्षियों की तैनाती की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख, SIT गठित
दो अधिकारियों — उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा — की हत्या की घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है।मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बरेली मंडलायुक्त की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी बड़ी साजिश या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों पर भी गिरी गाज
घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। देर रात सीओ डॉ. देवेंद्र कुमार को हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि उनकी जगह राहुल पाण्डेय को नया सीओ बनाया गया है। इससे पहले एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह को भी पद से हटाया जा चुका है।
