लखनऊ। गो रक्षा और सनातन धर्म की रक्षा के मुद्दे पर बुधवार को राजधानी लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ा ऐलान किया गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना का गठन किया जाएगा, जो संत समाज में फैल रही अशास्त्रीयता और अधर्म को दूर करने का कार्य करेगी।देशभर से आए संतों, धर्माचार्यों और गो रक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक समाज में धर्मनिरपेक्ष शपथ नहीं, बल्कि धर्म की शपथ ही चलेगी। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि परिस्थितियां बनीं तो धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
संत समाज में बढ़ रही विकृतियों पर भी चिंता जताई
कार्यक्रम में उन्होंने संत समाज में बढ़ रही विकृतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद के कुछ महंतों और साधुओं ने यह कहा कि वे मुख्यमंत्री के साथ हैं, शंकराचार्य के साथ नहीं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि अखाड़े साथ नहीं आते हैं तो अब अलग संगठन और सेना बनाकर धर्म की रक्षा की जाएगी।शंकराचार्य ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वेद पढ़ने वाले बटुकों के साथ अन्याय हुआ, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गोहत्या केवल कसाई ही नहीं करता, बल्कि जो इसे अनुमति देता है या मौन रहता है, वह भी उसी पाप का भागी है।
यह यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक चलेगी
इस दौरान उन्होंने “समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा” निकालने की भी घोषणा की। यह यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक चलेगी। यात्रा की शुरुआत गोरखपुर से होगी और वहीं इसका समापन भी होगा। इसके बाद 24 जुलाई को लखनऊ के कांशीराम स्मृति स्थल पर एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी।शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण हैं और गो माता की रक्षा के साथ-साथ सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प भी लेना होगा।
