तेहरान । ईरान इस वक्त गंभीर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। देशभर में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनाक्रोश खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। सत्ता विरोधी प्रदर्शन लगातार हिंसक होते जा रहे हैं और हालात काबू से बाहर होते नजर आ रहे हैं। सरकार आंदोलनों को दबाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, लेकिन इसके बावजूद आम लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और खुलेआम खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।
7 जनवरी के बाद इसने देशव्यापी और उग्र रूप ले लिया
बताया जा रहा है कि यह आंदोलन 28 दिसंबर को शुरू हुआ था, लेकिन 7 जनवरी के बाद इसने देशव्यापी और उग्र रूप ले लिया। कई शहरों में झड़पें, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और इंटरनेट पाबंदियों की खबरें सामने आ रही हैं। आंदोलन के दौरान अब तक सैकड़ों लोगों की जान जाने की सूचना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।
एजेंसी का दावा है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस जनआंदोलन में अब तक कम से कम 646 लोगों की मौत हो चुकी है। एजेंसी का दावा है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों से अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आ पाई है। यह संगठन लंबे समय से ईरान में हो रहे प्रदर्शनों पर नजर रखता रहा है और इसके आंकड़ों को आमतौर पर विश्वसनीय माना जाता है।
सख्ती के बीच ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण
रिपोर्ट के मुताबिक, यह एजेंसी ईरान के भीतर सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक मजबूत नेटवर्क पर निर्भर करती है, जो हर मौत की पुष्टि के बाद ही आंकड़े जारी करता है। लगातार बढ़ती मौतों और सरकार की सख्ती के बीच ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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