वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घेरने के लिए एक बार फिर आक्रामक रणनीति अपनाते हुए वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने साफ ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान के साथ किसी भी तरह का व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ होने वाले सभी कारोबारी लेन-देन पर सीधे 25 प्रतिशत टैरिफ चुकाना होगा। राष्ट्रपति ने इसे अंतिम और गैर-समझौतावादी फैसला बताते हुए कहा कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
ईरान 15 दिनों से देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की चपेट में
ट्रंप के इस फैसले को ईरान पर बढ़ते दबाव की बड़ी कड़ी माना जा रहा है। खासकर ऐसे वक्त में, जब ईरान बीते करीब 15 दिनों से देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है। सड़कों पर उग्र प्रदर्शन, सुरक्षा बलों की सख्ती, इंटरनेट बंदी और गिरफ्तारियों की खबरों के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।इसी तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए ईरान में अमेरिकी वर्चुअल दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा है। एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि प्रदर्शन हिंसक रूप ले सकते हैं, सुरक्षा हालात तेजी से बदल रहे हैं और आम नागरिकों को चोट या गिरफ्तारी का खतरा है।
इंटरनेट सेवाएं ठप हैं और कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द
कई इलाकों में सड़कें बंद हैं, सार्वजनिक परिवहन बाधित है, इंटरनेट सेवाएं ठप हैं और कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की जा रही हैं। अमेरिकी नागरिकों को तुर्किये या आर्मेनिया के रास्ते ईरान छोड़ने पर विचार करने की सलाह दी गई है।व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सभी विकल्प खुले रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की पहली प्राथमिकता कूटनीति है, लेकिन अगर देश की सुरक्षा या हितों को खतरा हुआ तो सैन्य कार्रवाई, यहां तक कि हवाई हमले जैसे विकल्पों से भी पीछे नहीं हटा जाएगा। लेविट के मुताबिक, ट्रंप ईरान से आ रहे सार्वजनिक बयानों और गुप्त कूटनीतिक संदेशों के बीच के अंतर को गंभीरता से परख रहे हैं।
टैरिफ नीति को लेकर सियासी और कानूनी तूफान खड़ा हो गया
उधर, अमेरिका के भीतर भी ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर सियासी और कानूनी तूफान खड़ा हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने तीखी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर अदालत ने टैरिफ नीति को रद्द किया, तो अमेरिका को सिर्फ सैकड़ों अरब डॉलर नहीं, बल्कि ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान झेलना पड़ सकता है।ट्रंप के मुताबिक, टैरिफ हटने की स्थिति में अमेरिका को न केवल वसूली गई राशि लौटानी पड़ेगी, बल्कि उन कंपनियों को भी मुआवजा देना होगा, जिन्होंने टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका में फैक्ट्रियां, प्लांट और मशीनरी लगाने में भारी निवेश किया है। उन्होंने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि इसी नीति के चलते अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ी और घरेलू निवेश को मजबूती मिली।
सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ को लेकर सुनवाई जारी
राष्ट्रपति ट्रंप ने चेताया कि इतनी बड़ी रकम चुकाना अमेरिका के लिए लगभग असंभव होगा और इसका असर सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ को लेकर सुनवाई जारी है, लेकिन ट्रंप के बयानों ने इस मुद्दे को कानूनी दायरे से निकालकर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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