एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश की हाल ही में जारी हुई मसौदा मतदाता सूची में ऐसी खामियां सामने आई हैं कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूची में कई जगह पंडित के घर पर खान साहब, एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग बूथों में और अस्पष्ट पते पर दर्ज मतदाता जैसे मामले देखने को मिल रहे हैं। विशेषज्ञ और आम मतदाता इस स्थिति को देखकर हैरान हैं और इसे चुनाव प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं।
रामपुर में पंडित के घर पर अजीब रिकॉर्ड
रामपुर जिले के मिलक विधानसभा क्षेत्र के पंडित डॉ. चंद्र प्रकाश शर्मा (71) के घर के पते पर कुल छह मतदाता होने चाहिए थे। लेकिन मसौदा सूची में उनके घर के पते पर पांच और मतदाता दिखाए गए हैं, जिनमें शबनम नाम की महिला और उसके परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं। यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि यह पांचवां मतदाता किसका है। डॉ. शर्मा, जो शास्त्रों के ज्ञाता और पूर्व वरिष्ठ प्रवक्ता हैं, इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं।
लखनऊ में परिवार बंटा-बंटा
दूसरी ओर, लखनऊ के डालीबाग निवासी अनूप मिश्रा के घर के 11 सदस्यों के नाम 3 अलग-अलग बूथों पर दर्ज हैं। उनका कहना है कि मतदान के दिन उनके परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर वोट देने जाएंगे, जिससे मतदाता भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
प्रदेश भर में गड़बड़ी
ये सिर्फ बानगी हैं। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मसौदा मतदाता सूची में इसी तरह की त्रुटियां देखने को मिल रही हैं। जबकि चुनाव आयोग का दावा है कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) अभियान मतदाता सूची को त्रुटि रहित बनाने के लिए चल रहा है, असल में यह अभियान बहुत से मतदाताओं को सूची से गायब करने का कारण भी बन रहा है।
4.46 करोड़ मतदाता “अज्ञात”
राज्य निर्वाचन आयोग की प्राथमिक सूची 2025 में पंचायत चुनाव के लिए 12.69 करोड़ और नगर निकाय चुनाव के लिए 4.32 करोड़ मतदाता शामिल हैं। कुल 17.01 करोड़ मतदाता। लेकिन विधानसभा सूची में केवल 12.55 करोड़ मतदाता हैं। यानी 4.46 करोड़ मतदाता “अज्ञात” हैं। चुनाव आयोग नए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी भी लगभग 84 लाख मतदाता का अंतर बरकरार है।
सपा अध्यक्ष ने उठाया बड़ा आरोप
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के दबाव में काम कर रहा चुनाव आयोग वोट लूट के समीकरण को समान नहीं कर पाया, जिससे पोल पूरी तरह खुल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों ने एक ही बीएलओ द्वारा SIR कराया, तो मतदाताओं की संख्या में ऐसा बड़ा अंतर क्यों आया? उन्होंने कहा कि विधानसभा SIR के बाद मतदाताओं की संख्या 2.89 करोड़ घटकर 12.56 करोड़ रह गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बयान
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि एक ही पते पर सामान्य से अधिक मतदाता होना केवल फर्जी मतदाता का प्रमाण नहीं है। लेकिन यह जांच का विषय हो सकता है कि क्या वे वास्तव में उसी क्षेत्र में रहते हैं या नहीं। मकानों को नंबर न दिए जाने से भी भ्रम पैदा होता है।मसौदा मतदाता सूची में सामने आई ये सनसनीखेज खामियां चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन खामियों को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो उत्तर प्रदेश में अगले चुनाव में मतदाता धोखाधड़ी की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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