मेरठ। सरधना के कपसाड़ गांव से महिला सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रुबी के अपहरण के मामले ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। अपहरण के अगले दिन शुक्रवार को भी पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। वहीं परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था।
सुनीता का शव लेकर परिवार घर में ही बैठा रहा
सुनीता का शव लेकर परिवार घर में ही बैठा रहा, इस बीच सपा, बसपा, भीम आर्मी, असपा के नेता-कार्यकर्ता और स्थानीय लोग लगातार हंगामा करते रहे। तनाव बढ़ते देख पुलिस ने गांव और आसपास के इलाकों को छावनी में बदल दिया, करीब 500 से अधिक पुलिसकर्मी, 20 इंस्पेक्टर, चार सीओ और आरआरएफ की टीम सहित मौके पर मुस्तैद रही।
48 घंटे में रुबी को ढूंढने का वादा
करीब 19 घंटे की जद्दोजहद के बाद पूर्व विधायक संगीत सोम, एसपी देहात अभिजीत कुमार और एडीएम सिटी की मौजूदगी में पुलिस ने परिवार से लिखित वादा किया कि 48 घंटे के भीतर रुबी को बरामद किया जाएगा। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी दिलाने का भरोसा, 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद, परिवार के एक सदस्य को शस्त्र लाइसेंस दिलाने की गारंटी दी। इसके बाद ही रात करीब 7:45 बजे सुनीता का अंतिम संस्कार किया गया। बेटे नरसी ने मुखाग्नि दी, और यह पल बहुत भावुक कर देने वाला रहा।
सपा विधायक अतुल प्रधान धरने पर बैठ गए
परिवार के अंतिम संस्कार में देरी और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के कारण सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी और कांग्रेस के नेता गांव के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए। विरोध के दौरान पुलिस ने गांव की सीमा पर बैरिकेडिंग कर रखी थी।सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि अनुसूचित जाति की महिला की हत्या और बेटी का अपहरण हुआ है, लेकिन यदि मामला किसी अन्य समुदाय का होता तो अब तक कड़ी कार्रवाई हो चुकी होती। उन्होंने परिवार के हक की लड़ाई जारी रखने का भरोसा दिया।
प्रशासन ने मोर्चा संभाला, हत्या और अपहरण का मामला
गांव की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने खुद मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने गांव में फ्लैग मार्च कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और परिवार से कई बार बंद कमरे में वार्ता की।बृहस्पतिवार सुबह सुनीता अपनी बेटी रुबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं, तभी पारस सोम, सुनील और उनके साथी फरसे से हमला कर सुनीता की हत्या कर दी और रुबी का अपहरण कर फरार हो गए।
सुनीता का इलाज मोदीपुरम अस्पताल में चल रहा था, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।ग्रामीण और राजनीतिक दलों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, बुलडोजर की कार्रवाई और परिवार को सुरक्षा व आर्थिक मदद की मांग की है।
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